चंडीगढ़: पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य में पराली जलाने के कुल 2,347 मामले दर्ज किए हैं। इन घटनाओं को लेकर प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए अब तक 647 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
पराली जलाने की घटनाओं का सीधा असर वायु गुणवत्ता पर पड़ता है। खासकर सर्दियों के मौसम में इसका धुआं प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना सकता है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में वायु प्रदूषण पहले से ही चिंता का विषय बना हुआ है।
2,347 घटनाओं पर बोर्ड की नजर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में पराली जलाने की 2,347 घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
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647 मामलों में दर्ज हुई FIR
पराली जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई के तहत 647 एफआईआर दर्ज की गई हैं। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करना और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना है।
वायु प्रदूषण को लेकर बढ़ी चिंता
पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण में प्रदूषण बढ़ाने वाले तत्वों को शामिल करता है। सर्दियों में हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के जमा होने से स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है।
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