Delhi News: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले 2026 के नए नियमों पर एक बार फिर विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित की जा रही है। सरकार का कहना है कि समिति छात्रों की चिंताओं पर विचार करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी वर्ग को नियमों के तहत उपेक्षित, असुरक्षित या आशंकित महसूस न हो।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे सभी छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने भी जोर दिया कि पूरी प्रक्रिया में सभी विद्यार्थियों के हितों और युवा पीढ़ी के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में लगा दी थी रोक
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में UGC के नए इक्विटी नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। अदालत ने नियमों की भाषा को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट बताते हुए इनके दुरुपयोग की आशंका जताई थी। विशेष रूप से नियम 3(C) में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा पर सवाल उठाए गए थे।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने टिप्पणी की थी कि इस प्रावधान में काफी अस्पष्टता है और इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत ने कहा था कि नियमों की भाषा में संशोधन और स्पष्टता की जरूरत है। फिलहाल 2026 के नए नियमों पर रोक जारी रहने के दौरान UGC के 2012 के नियम लागू रहेंगे।
SC-ST और OBC छात्रों के लिए बनाए गए थे नियम
UGC के 2026 के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव पर रोक लगाना था। इसके तहत शिक्षण संस्थानों को विशेष समितियां गठित करने और शिकायतों के निस्तारण के लिए हेल्पलाइन स्थापित करने का प्रावधान किया गया था। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई करना था।
इन नियमों को लेकर दिल्ली समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। अब केंद्र सरकार द्वारा विशेष समिति गठित करने की जानकारी दिए जाने के बाद इन नियमों के भविष्य और उनमें संभावित बदलावों को लेकर नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।
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