Mongla Port: चालाक चीन भारत के खिलाफ एक ऐसी साजिश रच रहा है, जिसने मोदी सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल आज यानि 5 नवंबर को चीन और बांग्लादेश के बीच मोंगला पोर्ट के बीच एमओयू प्रधानमंत्री तारिक रहमान की मौजूदगी में, बांग्लादेश और चीन के बीच बागेरहाट के मोंगला में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

यह समझौता ज्ञापन गुरुवार सुबह मोंगला में 'इन्वेस्ट बांग्लादेश' और 'चाइना रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन' (CRCC) के बीच हस्ताक्षरित किया गया। चलिए आपको बताते है कि Mongla Port भारत के लिए क्यों खास है?

मोंगला पोर्ट भारत के लिए सिरदर्द क्यों?

मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण के लिए बांग्लादेश ने चीन के साथ करीब 335.78 मिलियन डॉलर (करीब 336 मिलियन डॉलर) के कर्ज समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे चीन की रणनीतिक मौजूदगी बढ़ने की आशंका है। बता दें कि मोंगला पोर्ट बंगाल की खाड़ी के पास स्थित है। साथ ही यह भारत से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर है।

यहां चीन की आर्थिक और तकनीकी मौजूदगी बढ़ने से भारत की समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने की संभावनाओं को लेकर चिंता है।

क्या चीन बंगाल की खाड़ी में भारत को घेर रहा है?

चीन पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से लेकर म्यांमार के क्यौकफ्यू पोर्ट तक चीन की परियोजनाएं भारत की रणनीतिक निगरानी में हैं।

अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट में बढ़ता चीनी निवेश इस पूरे समीकरण को और महत्वपूर्ण बना रहा है। भारत की चिंता यह है कि चीन अगर अपने पड़ोसी देशों में बंदरगाहों, सड़क, रेलवे और औद्योगिक क्षेत्रों का नेटवर्क मजबूत करता है, तो भविष्य में उसे क्षेत्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर ज्यादा प्रभाव मिल सकता है।

भारत के सामने अब क्या चुनौती है?

मोंगला पोर्ट का मामला भारत के लिए सिर्फ चीन की एक नई परियोजना तक सीमित नहीं है। यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में बदलते समीकरण और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव की भी कहानी है।

भारत को एक तरफ अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करनी होगी, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को भी संतुलित रखना होगा। बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और सुरक्षा के क्षेत्र में गहरा सहयोग रहा है।

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