जब भी किसी को हिचकी आती है, तो अक्सर मजाक में कहा जाता है कि कोई अपना उसे याद कर रहा है। यह मान्यता इतनी प्रचलित है कि हिचकी आते ही लोग दोस्तों और करीबियों के नाम तक गिनने लगते हैं। लेकिन क्या वाकई किसी के याद करने और हिचकी आने के बीच कोई संबंध है? मेडिकल साइंस के मुताबिक, इसका जवाब है नहीं। हिचकी का किसी व्यक्ति की याद या भावनाओं से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। इसके पीछे शरीर की एक खास शारीरिक प्रक्रिया काम करती है।
हिचकी आने में डायाफ्राम की क्या होती है भूमिका?
हिचकी आने की मुख्य वजह डायाफ्राम नाम की मांसपेशी है। यह मांसपेशी छाती और पेट के बीच मौजूद होती है और सांस लेने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है। जब हम सांस अंदर लेते हैं, तो डायाफ्राम सिकुड़कर नीचे की ओर जाता है और फेफड़ों को फैलने में मदद करता है।
हालांकि, कभी-कभी यह मांसपेशी अचानक अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती है। इसके तुरंत बाद गले में मौजूद वोकल कॉर्ड्स बंद हो जाते हैं। इस वजह से हवा का प्रवाह अचानक रुकता है और मुंह से 'हिक' जैसी आवाज निकलती है। इसी प्रक्रिया को हम हिचकी कहते हैं।
आखिर किन वजहों से शुरू होती है हिचकी?
हमारे शरीर में वेगस नर्व और फ्रेनिक नर्व नाम की दो महत्वपूर्ण नसें होती हैं, जो डायाफ्राम की गतिविधियों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती हैं। इन नसों में किसी तरह की उत्तेजना होने पर हिचकी का रिफ्लेक्स सक्रिय हो सकता है।
इसके पीछे कई सामान्य वजह हो सकती हैं-
- बहुत तेजी से खाना खाना या भोजन को ठीक से न चबाना।
- जरूरत से ज्यादा खाना खा लेना।
- सोडा और दूसरे कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का अधिक सेवन।
- अचानक बहुत गर्म या ठंडी चीजों का सेवन।
- खाना खाते समय अधिक हवा निगल लेना।
- अचानक हंसना, उत्तेजित होना या भावनात्मक बदलाव महसूस करना।
इन परिस्थितियों में शरीर की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और डायाफ्राम में अचानक सिकुड़न शुरू हो सकती है।
48 घंटे से ज्यादा हिचकी आना क्यों है चिंता की बात?
ज्यादातर मामलों में हिचकी कुछ मिनटों में अपने आप बंद हो जाती है और इसके लिए किसी विशेष इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर हिचकी लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक बनी रहे, तो इसे मेडिकल भाषा में पर्सिस्टेंट हिचकी कहा जाता है।
लंबे समय तक हिचकी बने रहने के पीछे एसिड रिफ्लक्स, नसों में परेशानी, मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कुछ समस्याएं और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, ताकि इसके वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।
हिचकी रोकने के घरेलू तरीके कितने कारगर हैं?
अचानक हिचकी शुरू होने पर अक्सर लोग पानी पीने या कुछ समय के लिए सांस रोकने की सलाह देते हैं। कुछ लोगों को इन तरीकों से राहत भी मिलती है। धीरे-धीरे ठंडा पानी पीना और थोड़ी देर नियंत्रित तरीके से सांस रोकना आजमाए जाने वाले सामान्य उपाय हैं।
हालांकि, इन उपायों के काम करने का सटीक वैज्ञानिक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। माना जाता है कि सांस लेने के तरीके और गले में होने वाली उत्तेजना में बदलाव से हिचकी के रिफ्लेक्स पर असर पड़ सकता है। हर व्यक्ति में इन तरीकों का असर एक जैसा नहीं होता। अगर हिचकी लंबे समय तक बनी रहती है, तो बार-बार घरेलू उपाय आजमाने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
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अगली बार हिचकी आए तो क्या समझें?
अब अगली बार हिचकी आने पर किसी के याद करने की बात को मजाक तक ही सीमित रखिए। हकीकत यह है कि हिचकी शरीर के नर्वस सिस्टम और डायाफ्राम से जुड़ी एक सामान्य अनैच्छिक प्रतिक्रिया है। आमतौर पर यह नुकसानदायक नहीं होती, लेकिन लगातार बने रहने पर इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की संभावना को समझना जरूरी है।