नई दिल्ली: सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार कार्ड (Aadhaar) की जगह वोटर आईडी (Voter ID) इस्तेमाल करने के कथित प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से सवाल किया है। उन्होंने पूछा है कि क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने वास्तव में इस प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक नीति के रूप में स्वीकार कर लिया है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पंचायती राज मंत्री पिछले कुछ दिनों में दो बार यह बात कह चुके हैं कि सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार की जगह वोटर आईडी का इस्तेमाल किया जाएगा।

जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या यह अब मोदी सरकार की आधिकारिक नीति बन चुकी है? उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो इसका मतलब होगा कि आधार का इस्तेमाल उस प्राथमिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा, जिसके लिए इसे बनाया गया था।

आधार कार्ड के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने सामाजिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में आधार के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि आधार के इस्तेमाल के तरीके के कारण लाखों लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि आधार के जरिए लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया में पहले से ही कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यदि वोटर आईडी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान का आधार बनाया जाता है, तो इससे और अधिक लोगों के योजनाओं से बाहर होने की आशंका है।

SIR को आधार बनाने पर जयराम रमेश की चिंता

जयराम रमेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान मतदाता सूची के आधार पर की जाती है, तो बड़ी संख्या में पात्र लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि आधार के इस्तेमाल को लेकर पहले से वैध चिंताएं रही हैं, क्योंकि इसके कारण लाखों लोगों को सामाजिक कल्याण और सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच नहीं मिल पाई। उनके मुताबिक, SIR को आधार बनाने से बड़े पैमाने पर लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

'वोट चोरी' के बाद 'हक-हुकूक चोरी' का आरोप

कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को पार्टी के 'वोट चोरी' अभियान से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, " वोट चोरी तो सिर्फ ट्रेलर है। पूरी तस्वीर हक़-हुकूक चोरी की है।"

गौरतलब है कि जयराम रमेश की यह प्रतिक्रिया केंद्रीय पंचायती राज मंत्री के उन बयानों के बाद आई है, जिनमें सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार की जगह वोटर आईडी के संभावित इस्तेमाल की बात कही गई थी।

हालांकि, इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को आधिकारिक नीति घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सरकार वास्तव में आधार की जगह वोटर आईडी को लागू करने की योजना बना रही है या नहीं।

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