Sheikh Hasina: 2024 में एक बड़े जन-विद्रोह के ज़रिए सत्ता से हटाई गईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 'द एसोसिएटेड प्रेस' को बताया है कि वह अगले महीने भारत में अपने निर्वासन से बांग्लादेश लौटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालाँकि, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उनकी सरकार की घातक कार्रवाई के मामले में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है।
छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों के कारण सत्ता से बेदखल होने के बाद हसीना भारत आ गई थीं और तब से वह यहीं रह रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट में कहा था कि बांग्लादेश हिंसा में लगभग 1,400 लोग मारे गए। हसीना ने किसी भी तरह की गलत हरकत से इनकार किया है। उन्होंने ट्रिब्यूनल के फैसले को भी खारिज कर दिया है और मुकदमे की वैधता को चुनौती दी है। उनके नए बयान से सियासत गरमा गई है।
शेख हसीना के बयान से बढ़ी हलचल
बांग्लादेश ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सबसे पहले अगस्त में दिसंबर में लौटने के अपने इरादे की घोषणा की थी। समाचार एजेंसी एपी को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा, “मैं सभी देशों के साथ दोस्ती और सहयोग को अहमियत देती हूँ।
यही हमेशा से हमारी (बांग्लादेश की) विदेश नीति रही है। लेकिन अपने ही देश लौटने के लिए मुझे किसी विदेशी ताकत के आशीर्वाद की ज़रूरत नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि, “यदि मृत्यु ही मेरा भाग्य है, तो मैं अपने देश की धरती पर, अपने लोगों के बीच मरना पसंद करूंगी।”
तारिक रहमान सरकार के सामने क्यों बढ़ सकती है चुनौती?
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के लिए शेख हसीना की वापसी का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि तारिक रहमान की पार्टी BNP और शेख हसीना की अवामी लीग लंबे समय से एक-दूसरे की राजनीतिक विरोधी रही हैं।
फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP की सरकार बनी। वहीं, अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है और पार्टी के कई नेता देश से बाहर हैं या कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। ऐसे माहौल में हसीना की वापसी की घोषणा बांग्लादेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकती है।
वैश्विक अधिकार समूहों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने पहले ही उन कट्टरपंथी समूहों के उभार पर चिंता जताई थी, जिन्होंने अंतरिम प्रशासन के दौरान उदारवादी ताकतों को दबाने की कोशिश की थी। अल्पसंख्यक समूहों का कहना है कि उन्हें भी डराया-धमकाया गया था।
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