Pakistan: दिन-प्रतिदिन शहबाज सरकार की बेरहमी बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि पाकिस्तानी सेना आवाम पर कहर बरसा रही है। नौबत यह है कि पाकिस्तान में सेना और आतंकवादी संगठनों के बीच जारी संघर्ष का खामियाजा अब आम लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा के अशांत इलाकों से सामने आ रही ड्रोन हमलों की खबरों ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहीं आतंकवादी संगठनों के ड्रोन रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहे हैं, तो कहीं सेना के ड्रोन ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। जिसने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
घरों के ऊपर मंडरा रहे हथियारबंद ड्रोन
खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी और दक्षिणी वजीरिस्तान में ड्रोन हमलों की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। 31 अक्टूबर को नॉर्थ वजीरिस्तान के हरमूज गांव में रात के दौरान कम से कम छह हमलों की खबर सामने आई। इन हमलों में कई रिहायशी मकानों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई।
इसी दिन लक्की मरवत में एक रिहायशी मकान को निशाना बनाकर किए गए कथित ड्रोन हमले में यासीन नाम के एक व्यक्ति की मौत की रिपोर्ट आई। हालांकि, स्थानीय रिपोर्टों में इस हमले के लिए TTP से जुड़े आतंकियों पर संदेह जताया गया था। इसे पाकिस्तानी सेना का हमला बताने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान में क्यों बढ़ रही है हिंसा?
दरअसल, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में लंबे समय से सुरक्षा संकट बना हुआ है। प्रतिबंधित TTP और दूसरे हथियारबंद संगठन सुरक्षाबलों, पुलिस चौकियों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते रहे हैं।
इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। इन अभियानों में ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों को खत्म करना और सुरक्षा व्यवस्था बहाल करना है। दूसरी तरफ, रिहायशी इलाकों में हमलों और नागरिकों के घायल होने की खबरें सैन्य कार्रवाई के तरीकों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
यह भी पढ़े - Mongla Port: भारत के चिकन नेक से बंगाल की खाड़ी तक चीन की चाल! बांग्लादेश की नई डील से भारत में मचा हड़कंप