नई दिल्ली: दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती को बार-बार बढ़ाए जाने के खिलाफ रिटायर्ड सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में दिल्ली में CAPF की तैनाती की अवधि लगातार बढ़ाए जाने को चुनौती दी है। इस मामले में हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिका में उठाए गए मुद्दे को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय बलों की तैनाती से जोड़कर देखा जा रहा है।

संविधान के आर्टिकल 226 के तहत दायर की गई याचिका

इस मामले में रिटायर्ड सीनियर सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने संविधान के आर्टिकल 226 के तहत एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) के ज़रिए दिल्ली हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी है। इस याचिका में दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े कानून-व्यवस्था के कामों के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPFs) की बड़े पैमाने पर तैनाती को बार-बार बढ़ाने को चुनौती दी गई है। इस केस में वकील अंबुज दीक्षित और अमरीश रंजन पांडे के ज़रिए दायर की गई इस पिटीशन में तैनाती के कानूनी और प्रशासनिक आधार की न्यायिक जांच की मांग की गई है। जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में तैनात फोर्स की ज़रूरत, अनुपात, समय और समय-समय पर रिव्यू शामिल है।

CAPF के रिटायर्ड अफसर ने तैनाती को लेकर याचिका दी

शुरुआत में 301 कंपनियों को मंज़ूरी मिलने, 273 कंपनियों को 31 अक्टूबर, 2026 तक बनाए रखने और 270 कंपनियों को 16 नवंबर, 2026 तक और बढ़ाने की रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए, जोशी ने आर्टिकल 14, 19 और 21 के तहत संवैधानिक चिंताएं उठाई हैं। दायर की गई याचिका में ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को गृह मंत्रालय के ओरिजिनल ऑर्डर, पुलिस रिक्विजिशन, रिस्क असेसमेंट और फोर्स-वाइज डिप्लॉयमेंट के मिले-जुले आंकड़ों को रिकॉर्ड में लाने के निर्देश देने की मांग की गई है।