Pakistan: पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। महंगाई की मार से परेशान जनता का गुस्सा धीरे-धीरे सड़कों पर उतर रहा है। कहीं पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, तो कहीं किसान सरकार की नीतियों के विरोध में आवाज उठा रहे हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के सामने अब अर्थव्यवस्था को संभालने के साथ-साथ जनता के बढ़ते असंतोष को शांत करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
पाकिस्तान में खाने-पीने की चीजों से लेकर बिजली, गैस और परिवहन तक महंगे हो गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। आमदनी सीमित होने और खर्च लगातार बढ़ने के कारण लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या शहबाज सरकार आर्थिक संकट से देश को बाहर निकाल पाएगी या फिर जनता का विरोध आने वाले दिनों में और तेज होगा?
महंगाई ने बिगाड़ा आम जनता का बजट
पाकिस्तान में महंगाई की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2026 में देश की सालाना उपभोक्ता महंगाई दर 10.3 फीसदी दर्ज की गई। वहीं, अक्टूबर में जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा।
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में अल्पकालिक महंगाई दर सालाना आधार पर 11.85 फीसदी तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी के पीछे गेहूं के आटे समेत कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की महंगी कीमतें प्रमुख वजह रहीं।
इसका सीधा असर आम परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है। आटा, दाल, सब्जियां, दूध और रसोई गैस जैसी जरूरी चीजें खरीदने के लिए लोगों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। गरीब परिवारों के सामने अब जरूरतों में कटौती करने की नौबत आ रही है।
शहबाज सरकार के खिलाफ आवाम ने खोला मोर्चा
मैदे के 15 किलोग्राम के एक थैले की कीमत 2,500 पाकिस्तानी रुपये से अधिक है, जबकि स्थानीय मिलों का आटा 165-170 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा है, जिससे कामकाजी परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ 23 अक्टूबर को देश के विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया। पार्टी की मांग है कि पेट्रोलियम लेवी को पूरी तरह खत्म किया जाए, ताकि आम लोगों को ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके। आलम यह है कि पाकिस्तानी आवाम एक वक्त की रोटी के लिए तरस रही है।
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