Karnatka News: कर्नाटक में मंत्री बी नागेंद्र के इस्तीफे की पेशकश ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। बता दें कि बीजेपी के दबाव के बीच डीके शिवकुमार सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। मंत्री बी नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित तौर पर 89 करोड़ रुपये की अनियमितताओं के संबंध में अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की पेशकश की है। नागेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अपने फैसले से अवगत कराया और कहा कि वह कांग्रेस पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते और मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। विपक्षी बीजेपी और जेडीएस ने योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाया।

क्या है असली वजह?

कर्नाटक का विधानसभा सत्र अब खत्म हो चुका है, लेकिन वाल्मीकि निगम कथित घोटाले को लेकर कांग्रेस सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव अभी भी जारी है। लेकिन बी नागेंद्र के इस्तीफे ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। चर्चाओं का बाजार इस बात से भी गरम चल रहा है कि बी.नागेंद्र के इस कदम को उठाने की असली वजह भाजपा के तेज विरोध प्रदर्शन है। जो आरोपों को लेकर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही है और उसने राज्य सरकार के खिलाफ 10 दिवसीय पदयात्रा की घोषणा भी की गई है।

कानूनी कार्यवाही पूरी होने पर मंत्रिमंडल में करेंगे वापसी

खबरों की अटकलों के मुताबिक युवा सशक्तिकरण और खेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को भी इस्तीफे की बात से अवगत करा दिया गया है। इसके साथ ही मामले में अदालत से क्लीन चिट मिलने का पूरा भरोसा है और कानूनी कार्यवाही पूरी होने के बाद वे मंत्रिमंडल में वापस लौट आएंगे। सूत्रों के अनुसार, नागेंद्र का मानना ​​है कि भाजपा को आशंका है कि सरकार में उनकी वापसी से बल्लारी में कांग्रेस मजबूत हो सकती है। जहां उनका राजनीतिक प्रभाव है। मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा नागेंद्र के इस्तीफे को स्वीकार करने या न करने पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कांग्रेस हाई कमांड के साथ उनके फैसले पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।

बगैर अनुमति निकाला था मार्च

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फ्रीडम पार्क से मार्च निकालकर विधान सभा को घेरने की कोशिश की थी। लेकिन इसकी अनुमति न होने पर पुलिस ने विपक्ष के नेता आर. अशोक, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत कई बीजेपी और जेडीएस नेताओं व कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया था। विपक्ष की तरफ में आरोप लगाया गया था कि वाल्मीकि निगम में हुए कथित वित्तीय घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बी. नागेंद्र को तत्काल मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

बीजेपी ने आरोप लगाया था आरोप था कि करीब 89 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के बीच संबंधित विभाग के मंत्री पद पर रहना सही नहीं है। विपक्ष लगातार मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला कर रहा और नागेंद्र का इस्तीफा भी मांग रहा है। इस पूरे मामले में अब नागेंद्र की तरफ से मंत्री पद छोड़ने की पेशकश को बीजेपी के लगातार विरोध और राजनीतिक दबाव का कारण माना जा रहा है। हालांकि, इस्तीफा स्वीकार करने का अंतिम फैसला सीएम और कांग्रेस पर निर्भर करता है।

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