इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली एक मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज किए जाने के बाद इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मामले को संवेदनशीलता और आपसी सहमति के साथ सुलझाने की अपील की है। मायावती ने कहा कि महिलाओं की गरिमा, सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील रुख अपनाया जाना चाहिए, उन्होंने धार्मिक मामलों को लेकर अनावश्यक बयानबाजी और टिप्पणी से बचने की भी सलाह दी।
संविधान में सभी धर्मों के समान अधिकार की बात
बसपा सुप्रीमो ने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश के सभी जाति और धर्म के लोगों को समान अधिकार देने वाला धर्मनिरपेक्ष एवं समतामूलक संविधान दिया। उनके मुताबिक, संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है। ऐसे में सभी समुदायों को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं और आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।
आपसी बातचीत से मामला सुलझाने की मायावती की अपील
मायावती ने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म के साथ पर्दा, चादर या हिजाब पहनने जैसे विषयों को अदालत तक ले जाकर विवाद बढ़ाने के बजाय स्कूल प्रशासन और शासन-प्रशासन को बातचीत तथा आपसी समझ के जरिए समाधान तलाशना चाहिए। मायावती का कहना है कि इससे ऐसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की संभावनाएं भी कम होंगी।
धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणी से बचने की अपील
मायावती ने कहा कि बसपा सभी समाजों के सम्मान और हर व्यक्ति के जान-माल तथा धर्म की सुरक्षा में विश्वास रखती है, उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ, परंपरा या मान्यता से जुड़े संवेदनशील विषयों पर सोच-समझकर बोलें और अनावश्यक टिप्पणी से बचें, उन्होंने इसे देश और जनहित के लिए बेहतर बताया।
बदायूं में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर भी चिंता
मायावती ने बदायूं जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर चल रहे विवाद और तनाव पर भी चिंता व्यक्त की, उन्होंने शासन और प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने तथा सभी पक्षों के बीच शांतिपूर्ण और उचित समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।