केरल और दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला ओणम सिर्फ नई फसल, समृद्धि और खुशियों का पर्व नहीं है। इसके पीछे राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी है। मान्यता है कि ओणम के अवसर पर महाबली अपनी प्रजा से मिलने हर वर्ष पृथ्वी पर लौटते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब वामन रूप में भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेज दिया था, तो फिर उन्हें धरती पर वापस आने की अनुमति क्यों मिली?
कौन थे महाबली?
पौराणिक मान्यताओं में महाबली को असुर कुल का शक्तिशाली राजा बताया गया है। हालांकि, अपनी असुर पहचान के बावजूद वे प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय थे, उन्हें उदार, न्यायप्रिय और अपने वचन के प्रति अडिग शासक माना जाता है, कहा जाता है कि उनके शासन में लोगों के बीच भेदभाव नहीं था और राज्य में सुख-समृद्धि बनी रहती थी। महाबली की बढ़ती प्रतिष्ठा और शक्ति से देवताओं को चिंता होने लगी। इसी दौरान उन्होंने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने उनकी परीक्षा लेने के लिए वामन का रूप धारण किया और एक छोटे ब्राह्मण के वेश में यज्ञ स्थल पर पहुंचे।
वामन ने मांगी तीन पग भूमि
वामन ने महाबली से दान में केवल उतनी भूमि मांगी, जितनी तीन कदमों में आ सके। दानी राजा ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन ने अपना विराट स्वरूप धारण किया। अपने पहले कदम में उन्होंने पूरी पृथ्वी और दूसरे कदम में आकाश को नाप लिया। अब तीसरे कदम के लिए कोई जगह बाकी नहीं बची। तब महाबली ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए अपना सिर भगवान के सामने झुका दिया और तीसरा कदम अपने सिर पर रखने को कहा। भगवान विष्णु ने तीसरा कदम महाबली के सिर पर रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। हालांकि, महाबली की निष्ठा, दानशीलता और वचन निभाने की भावना से विष्णु प्रसन्न हुए।
महाबली को क्यों मिला धरती पर लौटने का वरदान?
कथा के अनुसार, पाताल लोक जाने से पहले महाबली ने भगवान विष्णु से अपनी प्रजा से दोबारा मिलने की इच्छा जताई। वे अपनी प्रजा से बेहद प्रेम करते थे और उससे दूर होना नहीं चाहते थे। महाबली के इसी भाव से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें विशेष वरदान दिया। मान्यता है कि उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा के बीच पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मिली। इसी वार्षिक आगमन को ओणम से जोड़ा जाता है।
ओणम पर होता है महाबली का स्वागत
केरल की लोक-परंपरा में माना जाता है कि ओणम के दिनों में महाबली अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए धरती पर आते हैं। उनके स्वागत के लिए लोग घरों की सफाई करते हैं और फूलों से सुंदर पुक्कलम यानी रंगोली सजाते हैं। घरों में पारंपरिक भोजन तैयार किया जाता है और परिवार तथा समुदाय के लोग मिलकर उत्सव मनाते हैं। इस तरह ओणम केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं रह जाता, बल्कि यह प्रकृति, नई फसल, समृद्धि, परिवार और सामुदायिक एकता का उत्सव भी बन जाता है। महाबली की कथा ओणम को एक खास संदेश देती है। एक अच्छे शासक की पहचान केवल उसकी शक्ति से नहीं, बल्कि अपनी प्रजा के प्रति उसके प्रेम, न्याय और समर्पण से होती है। शायद यही वजह है कि सदियों बाद भी महाबली को केरल की सांस्कृतिक स्मृति में एक प्रिय और आदर्श राजा के रूप में याद किया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। TNP News इसकी पुष्टि नहीं करता है।)