नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने रिटायर हो चुके जजों की दोबारा नियुक्ति को लेकर एक अहम खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को एड-हॉक जज के रूप में नियुक्त करने की व्यवस्था फिर से शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन बार एसोसिएशनों के विरोध के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी।
CJI सूर्यकांत ने बताया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच के दौरान इस व्यवस्था को दोबारा लागू करने पर विचार किया गया था। हालांकि, बार एसोसिएशनों ने इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करने शुरू कर दिए। ऐसे में इस योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
कोई भी बार एसोसिएशन को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि कोई भी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बार एसोसिएशन को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। CJI ने कहा कि रिटायर्ड जजों के अनुभव का इस्तेमाल न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है, लेकिन बार के विरोध ने इस पहल को रोक दिया।
ये टिप्पणियां CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राजस्थान के न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कीं।
रिटायर जजों को नियुक्ति की उम्मीद में नहीं मिला दूसरा काम
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस पहल के रुकने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई रिटायर्ड जजों ने एड-हॉक नियुक्ति की उम्मीद में निजी क्षेत्र में दूसरे काम स्वीकार नहीं किए थे।
उनका कहना था कि इन न्यायाधीशों को वैध उम्मीद थी कि उन्हें दोबारा न्यायिक सेवा का अवसर मिलेगा, लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
जस्टिस बागची ने अमेरिका की एक महिला न्यायाधीश से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया और बताया कि न्यायिक विशेषज्ञता का इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद भी लंबे समय तक किया जा सकता है।
पेंशन को लेकर CJI ने सुनाया न्यायिक अधिकारी का अनुभव
CJI सूर्यकांत ने एक ऐसे न्यायिक अधिकारी का अनुभव भी साझा किया, जिन्होंने कई वर्षों तक सेवा देने के बाद इस्तीफा दे दिया था और बाद में वकालत में लौट आए।
CJI के मुताबिक, उस अधिकारी ने नई पेंशन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया कि अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद अधिकतम 25 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलने की आशंका थी। अधिकारी ने उनसे सवाल किया था कि इतनी कम राशि में उनका गुजारा कैसे होगा।
संविधान का अनुच्छेद 224A, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार देता है कि वे राष्ट्रपति की सहमति से, उसी या किसी अन्य हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश से अनुरोध कर सकते हैं कि वे हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में बैठें और काम करें।
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