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AI के बढ़ते खतरे पर बड़ा फैसला, डीपफेक और चैटबॉट के लिए नए नियम लागू

नए नियमों के तहत अगर किसी फोटो, वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट को बनाने में AI की अहम भूमिका रही है तो उसे स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा।

AI के बढ़ते खतरे पर बड़ा फैसला, डीपफेक और चैटबॉट के लिए नए नियम लागू
Artificial Intelligence

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। आज AI की मदद से तस्वीरें, वीडियो, ऑडियो, लेख और इंसानों जैसी बातचीत तक तैयार करना आसान हो गया है, लेकिन इस तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ फर्जी कंटेंट, डीपफेक और गलत सूचनाओं का खतरा भी बढ़ा है। इन चुनौतियों को देखते हुए यूरोपीय संघ (EU) ने AI के उपयोग को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं, जो 2 अगस्त से सभी सदस्य देशों में प्रभावी हो चुके हैं।

डीपफेक कंटेंट पर रहेगी विशेष निगरानी

पिछले कुछ वर्षों में डीपफेक तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज, फोटो या वीडियो को इस तरह बदला जा सकता है कि वह पूरी तरह असली दिखाई दे। ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, चुनावों को प्रभावित करने या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से नए नियमों में डीपफेक सामग्री के लिए स्पष्ट पहचान अनिवार्य की गई है। यदि किसी नेता, सार्वजनिक व्यक्ति या किसी घटना से जुड़ा वीडियो या ऑडियो AI की मदद से तैयार किया गया है, तो उस पर साफ तौर पर बताया जाएगा कि यह कंटेंट कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाया गया है।

AI से तैयार कंटेंट पर लेबल लगाना होगा जरूरी

नए नियमों के अनुसार यदि किसी फोटो, वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट को तैयार करने में AI की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, तो उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य लोगों को यह जानकारी देना है कि वे जो सामग्री देख या पढ़ रहे हैं, वह इंसान द्वारा बनाई गई है या AI की सहायता से तैयार हुई है। यदि पूरा कंटेंट AI ने तैयार किया है, तो उस पर स्पष्ट AI-Generated लेबल लगाना होगा। वहीं, यदि किसी वास्तविक फोटो, वीडियो या लेख में AI की मदद से इस तरह बदलाव किया गया है कि वह वास्तविक लगे, तब भी उसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा।

AI चैटबॉट से बातचीत की जानकारी पहले मिलेगी

यूरोपीय संघ के नए नियम केवल विजुअल कंटेंट तक सीमित नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी AI चैटबॉट, वर्चुअल असिस्टेंट या AI एजेंट से बातचीत कर रहा है, तो उसे पहले ही बता दिया जाएगा कि सामने कोई इंसान नहीं बल्कि एक AI सिस्टम मौजूद है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों के बीच भ्रम की स्थिति को खत्म करना और डिजिटल सेवाओं पर भरोसा बनाए रखना है, ताकि यूजर्स यह समझ सकें कि उन्हें किस प्रकार की जानकारी मिल रही है।

बायोमेट्रिक और इमोशन रिकग्निशन सिस्टम भी दायरे में

नई गाइडलाइन उन AI सिस्टम पर भी लागू होगी जो लोगों की भावनाओं का विश्लेषण करते हैं या बायोमेट्रिक डेटा का उपयोग करते हैं। ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से किया जा रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध करानी होगी। यूरोपीय आयोग का मानना है कि जहां भी AI किसी महत्वपूर्ण निर्णय या प्रक्रिया का हिस्सा बने, वहां पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।

AI कंपनियों पर बढ़ीं जिम्मेदारियां

नए नियम सिर्फ कंटेंट बनाने वालों तक सीमित नहीं हैं। बड़े AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों को भी कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी होंगी। उन्हें अपने मॉडल से जुड़ी तकनीकी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी, प्रशिक्षण (Training) में इस्तेमाल किए गए डेटा का सार सार्वजनिक करना होगा और कॉपीराइट नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

नियमों की अनदेखी पर भारी आर्थिक दंड

यदि कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में लाखों यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, छोटे और मध्यम स्तर की कंपनियों के लिए उनकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए अलग प्रावधान किए गए हैं।

इंडस्ट्री ने जताई चिंता

AI क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों का कहना है कि इतने कड़े नियम नवाचार और नई तकनीकों के विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं। उनका मानना है कि अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया और अनुपालन संबंधी आवश्यकताएं छोटे डेवलपर्स के लिए चुनौती बन सकती हैं। हालांकि, यूरोपीय संघ का तर्क है कि एक समान नियम लागू होने से पूरे क्षेत्र में AI कंपनियों के लिए काम करना आसान होगा और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।

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भविष्य पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI से तैयार होने वाले कंटेंट की संख्या लगातार बढ़ेगी। ऐसे में यह जानना पहले से कहीं अधिक जरूरी होगा कि कौन-सी सामग्री इंसानों ने बनाई है और कौन-सी AI द्वारा तैयार की गई है। यूरोपीय संघ के नए नियम इसी पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में दूसरे देश भी इसी तरह के नियम अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

 

 

  Written By Toshi Shah  

Rajeev Singh

आपके दिए हुए प्रोफाइल को **राजीव सिंह** और **TNP News** के अनुसार ढालकर, NBT/Times of India से जुड़े संदर्भ हटाकर इस तरह किया जा सकता है: ## राजीव सिंह, TNP News में एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। राजीव सिंह TNP News में एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज और रिसर्च आधारित खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और एंटरटेनमेंट समेत विभिन्न कैटेगरी की खबरों से जुड़े होते हैं। किसी भी विषय पर स्टोरी तैयार करते समय शरद दीक्षित रिसर्च, डीप डाइव, फैक्ट चेक, वैल्यू एड और विशेषज्ञों की राय को विशेष महत्व देते हैं। TNP News के लिए वे महत्वपूर्ण और चर्चित मुद्दों पर विश्लेषणात्मक एवं रियल टाइम स्टोरीज तैयार करते हैं। उनका फोकस किसी भी खबर को केवल प्रस्तुत करने के बजाय उसके पीछे की पूरी कहानी, तथ्यों और उसके संभावित प्रभाव को पाठकों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहता है। राजीव सिंह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन की खबरों पर लगातार नजर रखने का अनुभव है। किसी भी खबर पर उनकी पहली प्राथमिकता तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी होती है। इसके बाद वे यह समझने पर जोर देते हैं कि उस खबर का समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ### पत्रकारिता का अनुभव राजीव सिंह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, रिसर्च, डिजिटल कंटेंट और स्पेशल स्टोरीज जैसी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने समाचारों के पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता की बदलती जरूरतों और नई तकनीकों को भी करीब से समझा है। उन्होंने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों को कवर करने के साथ-साथ राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव, सामाजिक विषयों, प्रशासनिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। TNP News में राजीव सिंह का प्रमुख फोकस रिसर्च आधारित पत्रकारिता, एक्सप्लेनर स्टोरी, डीप डाइव, स्पेशल स्टोरी और तथ्यपरक विश्लेषण पर है। उनका प्रयास रहता है कि जटिल और महत्वपूर्ण विषयों को आसान भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि पाठक खबर के साथ-साथ उसके कारण, प्रभाव और पूरे संदर्भ को भी समझ सके। ### पत्रकारिता का दृष्टिकोण राजीव सिंह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड पर उनकी लगातार नजर रहती है। वे खबर के तत्काल प्रभाव के साथ-साथ उसके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समझने और पाठकों के सामने रखने पर जोर देते हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को **खबर के पीछे की कहानी, तथ्य और उसका असर** समझाना है। ### TNP News में भूमिका TNP News में राजीव सिंह एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज, डीप डाइव और रिसर्च आधारित कंटेंट के साथ काम कर रहे हैं। वे महत्वपूर्ण घटनाओं और ट्रेंडिंग मुद्दों पर रियल टाइम एक्सप्लेनर और विश्लेषणात्मक स्टोरी तैयार करने के साथ डिजिटल ऑडियंस की जरूरतों के अनुसार कंटेंट को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर ध्यान देते हैं। TNP News के माध्यम से उनका प्रयास ऐसी पत्रकारिता को आगे बढ़ाना है जिसमें **तथ्य, रिसर्च, निष्पक्ष विश्लेषण और जनसरोकार** को प्राथमिकता मिले।

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