लखनऊ: उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन द्वारा राज्य के करीब 3.82 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 नवंबर 2026 से डबल स्टेज ऑडिट (दोहरी जांच) व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके तहत मीटर रीडिंग के बाद प्री-ऑडिट और बिल तैयार होने के बाद पोस्ट-ऑडिट किया जाएगा। इसका उद्देश्य बिजली बिलों में गणना की गलतियों और ओवरबिलिंग की शिकायतों को कम करना है। नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी बिलिंग प्रणाली मिलने की उम्मीद है। 

बिजली बिल गड़बड़ी को लेकर डबल स्टेज ऑडिट 1 नवंबर से लागू 

एक नवंबर से लागू कि जाने वाली यह व्यवस्था इसलिए  कि जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को सही बिजली बिल मिलें सके। इसके लिए दो चरणों में जांच के बाद ही उपभोक्ताओं को बिल भेजे जाएंगे। दो बार बिल चेक होने के बाद उसमें गड़बड़ी नहीं रह जाएंगी। दरअसल, तमाम उपभोक्ताओं के बिजली बिल हर महीने गड़बड़ बन जाते हैं, जिन्हें ठीक करवाने के लिए उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। गलत बिल की वजह से उपभोक्ता बार-बार भुगतान भी नहीं करते थे। इससे पावर कॉरपोरेशन का राजस्व भी प्रभावित होता था। ऐसे में इस समस्या के निपटने के लिए दो चरणों में परीक्षण की व्यवस्था तैयार की गई है।

उपभोक्ताओं के बिल बनाने से पहले रीडिंग की होगी दोहरी जांच

दरअसल, गड़बड़ बिल जारी होना एक बड़ी समस्या है। लेकिन इस व्यवस्था में बिल बनाने से पहले रीडिंग की जांच होगी और उसके बाद जब रीडिंग के आधार पर बिल तैयार हो जाएगा। इसके बाद उसकी भी जांच की जाएगी। तब जाकर उपभोक्ताओं को बिल भेजे जाएंगे। पावर कॉरपोरेशन मानना है कि इससे गलत बिल तैयार होने की संभावनाएं कम होंगी और उपभोक्ताओं को सही बिल उपलब्ध करवाए जा सकेंगे। इसके अलावा तय तारीख के पहले कनेक्शन काटे जाने की समस्या भी खत्म करने के लिए भी सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव कर दिए गए हैं।