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इमोशनल सपोर्ट देने में AI चैटबॉट कितने हैं असरदार? रिसर्च में सामने आईं चौंकाने वाली बात
इमोशनल मामलों को हैंडल करने में एआई चैटबॉट इंसानों से बेहतर हो गए हैं। एक रिसर्च में यह बात निकलकर सामने आई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कैलकुलेशन, डेटा एनालिसिस और टेक्निकल कामों तक सीमित नहीं रह गई है। हालिया रिसर्च से संकेत मिले हैं कि AI चैटबॉट भावनात्मक परिस्थितियों में भी लोगों को सपोर्ट देने में काफी प्रभावी हो सकते हैं। बात दें एक स्टडी में पाया गया कि कुछ मामलों में AI चैटबॉट्स इंसानों की तुलना में बेहतर इमोशनल सपोर्ट दे सकते हैं।
रिसर्च में 1200 से ज्यादा लोग शामिल
इस रिसर्च में 1200 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था। इसमें ChatGPT-4o, Claude 3.5 Sonnet और Gemini 1.5 Pro जैसे प्रमुख AI मॉडल्स के जवाबों का मूल्यांकन किया गया। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को AI और इंसान किस तरह का सपोर्ट देते हैं।
गुस्से और डर जैसी भावनाओं में AI का बेहतर प्रदर्शन
रिसर्च के अनुसार, गुस्से और डर जैसी भावनात्मक स्थितियों में AI चैटबॉट्स ने इंसानों की तुलना में ज्यादा प्रभावी प्रतिक्रियाएं दीं। AI ने यूजर्स को शांत करने, सकारात्मक सोच विकसित करने और बेहतर महसूस कराने में मदद की। चैटबॉट्स ने कई बार शांति, उम्मीद और खुशी जैसे सकारात्मक भावों को बढ़ावा देने वाले जवाब दिए।
उदासी जैसी भावनाओं पर AI और इंसानों में बड़ा अंतर
वहीं, जब उदासी जैसी भावनाओं की बात आई तो AI और इंसानों के सपोर्ट में ज्यादा बड़ा अंतर देखने को नहीं मिला। इसके अलावा, जब किसी समस्या से निपटने के लिए व्यावहारिक सलाह देने की बात आई तो AI चैटबॉट्स आगे नजर आए। उन्होंने यूजर्स को ब्रीदिंग एक्सरसाइज, तनाव कम करने के तरीके और दूसरी उपयोगी गाइडलाइंस विस्तार से उपलब्ध कराईं।
फिर भी इंसानी सपोर्ट की अपनी है अहमियत
हालांकि, रिसर्च यह साबित नहीं करती कि AI इंसानों की जगह पूरी तरह ले सकता है। इस अध्ययन में मुख्य रूप से छोटे और लिखित जवाबों पर ध्यान दिया गया था। इसमें यह जांच नहीं की गई कि लंबे समय तक AI पर भावनात्मक निर्भरता का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
इंसान की जगह नहीं ले सकता AI
एक रिसर्चर में बताया गया कि AI सलाह दे सकता है, लेकिन इंसानी रिश्तों की जगह नहीं ले सकता। उदाहरण के तौर पर, AI आपको टहलने की सलाह दे सकता है, लेकिन कोई दोस्त आपके साथ उस वॉक पर जा सकता है, आपकी बात सुन सकता है और बाद में भी आपका साथ दे सकता है।
AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता का खतरा
AI ने कई क्षेत्रों में इंसानों के काम को आसान बनाया है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक भी हो सकता है। कुछ अन्य अध्ययनों में यह सामने आया है कि AI पर अत्यधिक निर्भर रहने से लोगों की अपनी सोचने और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
समझदारी से इस्तेमाल है बेहतर रास्ता
इसलिए AI चैटबॉट्स को एक मददगार टूल की तरह इस्तेमाल करना बेहतर है, न कि उन्हें पूरी तरह इंसानी रिश्तों और भावनात्मक सहयोग का विकल्प मान लेना। तकनीक सुविधा दे सकती है, लेकिन वास्तविक मानवीय जुड़ाव की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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