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सरकार ने Meta को फिर जारी किया नोटिस, Instagram पर आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर मांगा जवाब
भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta को एक बार फिर नोटिस जारी किया है। पिछले तीन दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है, जब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है।
भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta को एक बार फिर नोटिस जारी किया है। पिछले तीन दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है, जब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इस बार मामला Instagram पर दिखाए गए कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों से जुड़ा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे विज्ञापन पाए गए जिनमें बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री (CSAM) होने की आशंका जताई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने Meta के अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा है।
MeitY ने पूछा- ऐसे विज्ञापनों को मंजूरी कैसे मिली?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने MeitY अधिकारियों को निर्देश दिया है कि Meta से इस पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जाए। मंत्रालय ने कंपनी से पूछा है कि आखिर ऐसे विज्ञापन Instagram पर कैसे स्वीकृत हुए और यूजर्स तक कैसे पहुंचे।सरकार ने यह भी जानना चाहा है कि Meta के कंटेंट मॉडरेशन, ऑटोमेटेड डिटेक्शन और प्रिवेंशन सिस्टम इस तरह की सामग्री की पहचान करने और उसे रोकने में क्यों विफल रहे। अधिकारियों ने कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
Meta ने हटाए विवादित विज्ञापन
एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की आपत्ति के बाद Meta ने Instagram से संबंधित सभी विवादित विज्ञापनों को हटा दिया है। कंपनी ने अपने जवाब में कहा है कि बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकार के यौन शोषण या आपत्तिजनक कंटेंट को वह अपनी नीतियों का गंभीर उल्लंघन मानती है। Meta का कहना है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऑटोमेटेड डिटेक्शन सिस्टम, एडवांस मॉनिटरिंग टूल्स और विशेषज्ञों की समर्पित रिव्यू टीम का उपयोग करती है। कंपनी ने यह भी बताया कि वह बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम करती है।
लगातार दूसरी बार सरकार के निशाने पर Meta
यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में Meta को सरकार की ओर से नोटिस मिला हो। इससे पहले केंद्र सरकार ने WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था। सरकार ने चिंता जताई थी कि यदि इस फीचर का दुरुपयोग हुआ तो साइबर फ्रॉड, पहचान की चोरी (Identity Theft) और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार ने Meta से पूछा था कि इन संभावित जोखिमों को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इसके जवाब में कंपनी ने कहा था कि यूजरनेम फीचर का उद्देश्य यूजर्स की गोपनीयता को बेहतर बनाना है। Meta के अनुसार, इस फीचर में कई सुरक्षा स्तर जोड़े गए हैं ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की संभावना को कम किया जा सके।
ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार की बढ़ी निगरानी
लगातार जारी हो रहे नोटिस यह संकेत देते हैं कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कंटेंट और नए डिजिटल फीचर्स को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रही है। विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा, साइबर अपराध और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर सरकार सख्त निगरानी बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों से कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र को लेकर और अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा की जा सकती है। वहीं, Meta सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी अपने मॉडरेशन सिस्टम को और प्रभावी बनाने का दबाव बढ़ सकता है।
Written By: Geeta Sharma
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