दिल्ली: दिल्ली में एक और बहुमंजिला इमारत के गिरने से राजधानी में बिल्डिंग सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ गई है। बुधवार, 7 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या कितनी जानें गई हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। 

अचानक भरभराकर गिरी पूरी इमारत

प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, इमारत के गिरते ही भारी मात्रा में मलबा सड़क और आसपास के इलाके में फैल गया। पुलिस, दमकल और अन्य राहत टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। हादसे के बाद सीमापुरी इलाके में ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। अभी तक इमारत गिरने की असली वजह सामने नहीं आई है। ऐसे में यह साफ होना बाकी है कि हादसा भवन की जर्जर हालत, निर्माण संबंधी किसी खामी या किसी अन्य कारण से हुआ।

लेकिन सवाल सिर्फ सीमापुरी का नहीं…

सीमापुरी की घटना ऐसे वक्त हुई है जब दिल्ली एक महीने पहले हुए सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसे से जुड़े सवालों का सामना कर रही है। 6 सितंबर को सत्य निकेतन में छात्रों के लिए इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। पुलिस जांच में बाद में सामने आया कि हादसे से पहले इमारत में निर्माण और बदलाव का काम चल रहा था। 

सत्य निकेतन के बाद शुरू हुआ था सुरक्षा जांच का दौर

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG और हॉस्टल की इमारतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर सवाल उठे। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद MCD ने राजधानी में PG इमारतों का सर्वे शुरू किया। शुरुआती कार्रवाई में करीब 1,355 PG इमारतों का निरीक्षण किया गया और इनमें से तीन को खतरनाक बताया गया था। 

मामला यहीं नहीं रुका। सितंबर के अंत में MCD ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि राजधानी में चिन्हित 2,453 PG इमारतों में से 70 फीसदी से ज्यादा के बिल्डिंग प्लान उसके रिकॉर्ड में नहीं मिल पाए हैं। सर्वे में करीब 50,529 लोगों के PG इमारतों में रहने की जानकारी सामने आई। MCD ने यह भी बताया कि चार PG इमारतों को खतरनाक माना गया है। 

कार्रवाई के दावों के बीच फिर सामने आया बड़ा सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद खतरनाक और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। MCD की ओर से बड़ी संख्या में संपत्तियों को तोड़ने और सील करने की कार्रवाई भी बताई गई। लेकिन अब सीमापुरी में एक और बहुमंजिला इमारत के गिरने से सवाल फिर वही है—क्या दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा की निगरानी सिर्फ हादसे के बाद तेज होती है?

फिलहाल सीमापुरी में राहत और बचाव अभियान सबसे अहम है। हादसे की वजह और इमारत की सुरक्षा स्थिति की तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी। लेकिन सत्य निकेतन के बाद इतने कम समय में सामने आया यह दूसरा बड़ा बिल्डिंग हादसा राजधानी में पुरानी और कमजोर इमारतों, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर चिंता जरूर बढ़ाता है।

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