नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने न्यूरोसाइंस की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं ने पहली बार ऐसे चूहे तैयार किए हैं, जिनके दिमाग में लैब में तैयार किया गया मानव मस्तिष्क का टिश्यू सफलतापूर्वक विकसित हुआ और उसने चूहे के नर्वस सिस्टम के साथ काम करने वाले कनेक्शन भी बनाए। इस नई तकनीक से इंसानी दिमाग के विकास और कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को समझने में मदद मिल सकती है। यह रिसर्च Nature जर्नल में प्रकाशित हुई है।
कैसे तैयार किया गया इंसानी Brain Tissue?
स्टैनफोर्ड मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने मानव कोशिकाओं से cortical organoids तैयार किए। ये छोटे, 3D टिश्यू मॉडल होते हैं, जिन्हें स्टेम सेल तकनीक की मदद से विकसित किया जाता है। इसके लिए इंसानी त्वचा या रक्त कोशिकाओं को दोबारा प्रोग्राम करके ऐसी स्टेम कोशिकाओं में बदला गया, जो अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में विकसित हो सकती हैं।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने ऐसे चूहों को तैयार किया, जिनके दिमाग का एक बड़ा हिस्सा सामान्य तरीके से विकसित नहीं होता। इससे उनके दिमाग में इंसानी cortical tissue के लिए पर्याप्त जगह बन गई। जन्म के शुरुआती दिनों में इन चूहों के दिमाग में human cortical organoids को प्रत्यारोपित किया गया।
चूहे के नर्वस सिस्टम से जुड़ गया इंसानी टिश्यू
रिसर्च में सामने आया कि इंसानी टिश्यू सिर्फ चूहे के दिमाग में मौजूद नहीं रहा, बल्कि वह विकसित हुआ और उसने चूहे के nervous system के साथ functional connections भी बनाए। मानव न्यूरॉन्स ने चूहे के दिमाग के अलग-अलग हिस्सों और spinal cord की दिशा में connections बनाए।
वैज्ञानिकों को मानव cortical cells की कई अलग-अलग किस्में भी मिलीं। इनमें von Economo neurons नाम की एक दुर्लभ cell type शामिल थी, जिसे पहले सामान्य laboratory cell cultures में देखना मुश्किल था। ये कोशिकाएं इंसानी दिमाग की जटिल संरचना को समझने के लिए खास महत्व रखती हैं।
Autism और Epilepsy जैसी बीमारियों की स्टडी में मदद
इस रिसर्च की सबसे बड़ी उपयोगिता बीमारियों को समझने में हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह मॉडल autism, epilepsy, schizophrenia और cerebral palsy जैसी developmental और neurological conditions की जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इंसानी दिमाग के शुरुआती विकास को सीधे इंसानों में देखना संभव नहीं है, इसलिए यह मॉडल रिसर्चर्स को एक नया रास्ता देता है।
शोधकर्ताओं ने शुरुआती प्रयोग के तौर पर इन चूहों को oxygen deprivation की स्थिति में भी रखा। इसमें इंसानी cortical cells को नुकसान हुआ और चूहों में gait तथा motor coordination से जुड़ी समस्याएं देखी गईं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि जन्म के आसपास ऑक्सीजन की कमी मानव मस्तिष्क के विकास को कैसे प्रभावित करती है।
क्या ये ‘आधे इंसान’ चूहे हैं?
वैज्ञानिकों ने इस तरह के चूहों को “humanized mice” या “mice with human brains” कहना सही नहीं माना है। इनके शरीर और nervous system का बड़ा हिस्सा अब भी चूहे का ही है। इनमें केवल बड़ा हिस्सा मानव cortical tissue का विकसित किया गया है, जो चूहे के nervous system से जुड़ता है।
इस रिसर्च के साथ ethical सवाल भी जुड़े हैं। वैज्ञानिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे प्रयोगों में जानवरों की पीड़ा कम से कम हो और मानव neural tissue के ज्यादा जटिल होने से कोई अप्रत्याशित बदलाव न आए। फिर भी शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को समझने और भविष्य में नए इलाज विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण research tool बन सकती है।
यह भी पढ़ें: ‘वोटर लिस्ट से नाम ही हट जाएंगे तो SIR का क्या मतलब?’ Bombay HC का ECI से सवाल