वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने बुधवार 7, अक्टूबर को वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में संयुक्त रूप से 'शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर' का उद्घाटन किया और इसे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की याद में समर्पित किया।

कॉरिडोर भारत-जापान के गहरे संबंधों का प्रतीक

दरअसल, यह कॉरिडोर भारत-जापान के गहरे संबंधों और दिवंगत जापानी नेता शिंजो आबे के योगदान को समर्पित है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह कॉरिडोर भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक, कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की मित्रता ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और यह रिश्ता पद या प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित था।

सेंटर की दीवारों पर 108 प्रतीकात्मक रुद्राक्ष लगाए गए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर 108 प्रतीकात्मक रुद्राक्ष लगाए गए हैं। जापान के लोगों के लिए 108 की संख्या का विशेष महत्व है। दिसंबर के आखिरी दिन, जापान के सभी बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं, और माना जाता है कि इंसानों में 108 तरह के विकार या बुराइयां होती हैं।

CM योगी ने अकी आबे को एक स्मृति चिन्ह भेंट की

योगी ने याद दिलाया कि 2007 में नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद काशी-क्योटो साझेदारी, वाराणसी में गंगा आरती में आबे की भागीदारी और अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना जैसे कई महत्वपूर्ण कदम भारत-जापान संबंधों की पहचान बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में लगभग 1,400 जापानी कंपनियां भारत में कार्य कर रही हैं और दोनों देशों की साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ग्रीन हाइड्रोजन तथा महत्वपूर्ण खनिजों जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश ने जापानी कंपनियों के साथ करीब 90,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौते किए हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को एक स्मृति चिन्ह भेंट किया।

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