Dhanteras 2026: दिवाली का त्योहार पास आ रहा है ऐसे में लोगो के मन में सिर्फ यही सवाल है कि आखिर धनतेरस कब है? दिवाली कब है और धनतेरस दिवाली की पूजा विधि क्या है? इसे कैसे मनाये? तो आज हम आपको बताएंगे कि धनतेरस कब हैं और दिवाली धनतेरस की पूजा विधि क्या है?
दिवाली से पहले धनतेरस के त्योहार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस साल धनतेरस के संयोग 6 और 7 नवंबर दोनों दिन बन रहे है, यानि शुक्रवार की सुबह से शनिवार की शाम तक आप धनतेरस की पूजा कर सकते है।
कब है धनतेरस 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाई जाती है। इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। वही इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और शाम को दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि तथा माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
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धनतेरस पर क्या है शुभ मुहूर्त
बता दें कि धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। वही हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर शुक्रवार को दिन में 11:06 बजे से हो रही है। इस त्रयोदशी तिथि का समापन 7 नवंबर शनिवार को दिन में 10 बजकर 46 मिनट पर होगा।
धनतेरस पर खरीदारी करने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त 6 नवंबर शुक्रवार को दिन में 11 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर शनिवार को दिन में 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
इस दौरान दोनों ही दिन खरीदारी करना अत्यंत फलदायी और शुभ माना गया है। इसके अलावा मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा भी इस पूरी समयावधि में कभी भी संपन्न की जा सकती है।
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पूजन विधि
धनतेरस के दिन शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू करनी चाहिए। सबसे पहले घी का दीपक जलाएं और पुष्प, चंदन, अक्षत तथा कमल का फूल अर्पित करें।
इसके बाद श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र, अन्नपूर्णा स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम का भक्तिभाव से पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी होता है।
भोग और अर्पण
पूजन के दौरान भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी को सफेद रंग के मिष्ठान्न का भोग लगाना चाहिए। वहीं आरोग्य के देवता धन्वंतरि जी को पीले रंग की मिठाई का भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस विधि-विधान से पूजा करने पर घर-परिवार में निरोगी काया के साथ-साथ धन और धान्य की कभी कोई कमी नहीं रहती है।
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शाम को घर के मुख्य द्वार पर जलाये यम का दिया
धनतेरस के दिन शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाने और यम दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे परिवार पर आने वाले संकट दूर रहते हैं।
धनतेरस पर क्यों की जाती है भगवान धन्वंतरि की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी वजह से धनतेरस पर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन लोग अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ
धनतेरस के दिन खरीदारी का विशेष महत्व है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार कई चीजें खरीदते हैं।
- सोना-चांदी: सोने और चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदना शुभ माना जाता है।
- बर्तन: पीतल, तांबे और स्टील के बर्तन खरीदने की परंपरा है।
- झाड़ू: झाड़ू को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है।
- धनिया: साबुत धनिया खरीदना भी शुभ मानते हैं।
- वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स: कई लोग इस दिन नई गाड़ी, मोबाइल और घरेलू सामान खरीदते हैं।
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