govardhan puja 2026: Diwali को लेकर लोगों में अलग ही उत्साह बना हुआ है। बाजार रोशनी की रौनक से सराबोर हो चुके हैं। नए कपड़ों से लेकर दीवाली के लिए लोगों ने जरूरत का सामान लेना शुरू कर दिया है। जगह-जगह दीये और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा की बिक्री हो रही है। दीवाली के अगले दिन आता है गोवर्धन। हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा की खास परंपरा है।
लेकिन जैसे इस बार दीवाली की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वैसे ही दीवाली के अगले दिन आने मनाए जाने वाले गोवर्धन पर्व की सही तिथि को लेकर लोग परेशान है। आखिर किस दिन गोवर्धन की पूजा करें? तो चलिए आपको बताते हैं, गोवर्धन पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त से लेकर क्या है पूजन की सही विधि?
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गोवर्धन मनाने की परंपरा है पौराणिक
कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि इस बार 2 दिन रहेगी। अब लोगों के सामने असमंजस की स्थिति बन रही है कि आखिर गोवर्धन पूजन 9 या 10 नवंबर आखिर किस दिन करें। तो पंचांग के मुताबिक बताते हैं आपको गोवर्धन पूजा की तिथि और मुहूर्त और पूजन की सही विधि।
गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ी पौराणिक कथा की याद में दीपावली के अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्ण की पूजा के लिए गाय के गोबर से उनकी आकृति बनाकर पूजा की जाती है।
पंचांग के अनुसार जानिए सही तिथि और पूजन का सही समय
पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 10 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर इस साल गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।
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गोवर्धन पूजन का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा के लिए इस बार तीन शुभ मुहूर्त हैं।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:41 बजे से 8:51 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से 5:57 बजे तक
पूजा की विधि
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं।
इसे फूलों, रोली, अक्षत और दीपक से सजाएं। शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण और अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए पूजा करें।
इसके बाद धूप, दीप, फल, फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
इस दिन अन्नकूट, फल, मिठाई और घर में बने पकवानों का भोग लगाने की भी परंपरा है।
क्या है पौराणिक कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में ब्रज के लोग अच्छी बारिश और समृद्धि के लिए देवराज इंद्र की पूजा करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि उन्हें गोवर्धन पर्वत, प्रकृति और गायों की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि ये उनके जीवन और आजीविका का आधार हैं। इससे नाराज होकर इंद्रदेव ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। लगातार सात दिनों तक बारिश करने के बाद इंद्रदेव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा: इस दिन भगवान कृष्ण के गोवर्धनधारी स्वरूप की पूजा की जाती है।
प्रकृति का सम्मान: गोवर्धन पर्वत, पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझाया जाता है।
गौ माता की पूजा: गायों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है।
अन्नकूट का आयोजन: भगवान कृष्ण को 56 भोग और तरह-तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं।
गोवर्धन पूजा का संदेश
गोवर्धन पूजा हमें सिखाती है कि प्रकृति, पर्यावरण, पशुओं और अन्न का सम्मान करना चाहिए। साथ ही यह पर्व अहंकार छोड़कर विनम्रता और सामूहिक एकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
सात बार करें परिक्रमा
गाय के गोबर से बनाई जाने वाली गोवर्धन की आकृति व पूजा के दौरान पर्वत की 7 बार परिक्रमा करने का विधान है। इस दौरान हाथ में जल से भरा लोटा लेकर जौ बोते हुए परिक्रमा की जाती है। गोवर्धन पर्वत की आकृति की नाभि वाले स्थान पर दीपक रखकर उसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे आदि अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
गोवर्धन भगवान की आरती
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे गले में कंठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरी सात कोस की परिकम्मा,
चकलेश्वर है विश्राम।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरा कानन कुंडल चमक रहेओ,
तेरी झाँकी बनी विशाल।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
करो भक्त का बेड़ा पार।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
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