एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी अपनी बयानबाजी को लेकर हमेशा सुर्खियों में छाए रहते हैं। इस बार उनके एक बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में जोरदार घमासान मचा दिया है। जिसमें ओवैसी ने कहा था कि, अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा, बल्कि खुद नेता, विधायक और सांसद बनेगा। ओवैसी ने यह बयान अमेरिका के मिशिगन में हुए मिडटर्म चुनाव में अब्दुल अल-सैयद की जीत को लेकर खुशी जताते हुए दिया है।

उन्होंने कहा कि जब अमेरिका में एक 'अब्दुल' जीत सकता है, तो उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को भी अपनी स्वतंत्र सियासी पहचान मजबूत करनी होगी। ओवैसी ने भले ही यह बयान अपने समुदाय के लोगों को लेकर दिया है, लेकिन कहीं ना कहीं उनके दिए इस एक बयान ने यूपी की सियासत में आग लगाकर कर रख दी है। ऐसे में कुछ पार्टी सत्ता की आग में सियासत की रोटियां सेकने का काम भी कर रही हैं।

मुस्लिम नेतृत्व और वोट बैंक को लेकर नई बहस

असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व और वोट बैंक को लेकर नई बहस छेड़ दी है। AIMIM प्रमुख ने साफ संदेश दिया है कि अब मुस्लिम समाज केवल दूसरी पार्टियों के लिए वोट करने और उनके नेताओं की सभाओं में दरी बिछाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खुद राजनीतिक नेतृत्व करेगा। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के साथ मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ राजनीति में भी पारा हाई कर दिया है।

ओवैसी ने किया था X पर पोस्ट

ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए अब्दुल अल-सयद की जीत को उत्तर प्रदेश की सियासत से जोड़ दिया। उन्होंने लिखा, एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी।" उन्होंने आगे लिखा, "संघियों ने 'अब्दुल' को एक तंज में बदलने की बहुत कोशिश की है। वक्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता। अब दरी नहीं बिछाएंगे।

2027 के चुनाव में बयान का क्या मतलब?

इस पूरे विवाद को समझा जाए तो सबसे प्रमुख है मुस्लिम वोटर्स को मजबूत करना। AIMIM चाहती है कि यूपी के चुनावों में केवल मुस्लिम मतदाता ही नहीं बल्कि उम्मीदवारों की संख्या को जनता का समर्थन मिले। अपने प्रतिनिधियों का चुनाव खुलकर करें। इसके साथ ही सपा के पारंपरिक आधार को भी यह बयान चुनौती के तौर पर देखा गया है। प्रदेश में समाजवादी पार्टी मुस्लिम मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार रखती है।

ओवैसी इसी आधार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं इसके साथ-साथ गठबंधन की राजनीति को लेकर भी इस बयान को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओवैसी विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभावना भी जता चुके हैं, लेकिन उनकी मांग है कि AIMIM को बराबर की राजनीतिक हिस्सेदारी मिले।

बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने की आलोचना

ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग 'अब्दुल' का मजाक उड़ाते हैं, जबकि समाजवादी पार्टी मुसलमानों को सिर्फ एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल करती है और उन्हें सिर्फ दरी बिछाने तक सीमित रखती है। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर भी परिवारवाद और मुस्लिम नेतृत्व को दबाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस व अन्य दलों की क्या है प्रतिक्रिया?

ओवैसी के इस बयान के बाद इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) और विशेष रूप से कांग्रेस नेताओं (जैसे इमरान मसूद) ने पलटवार किया है और मुस्लिम प्रतिनिधित्व के मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ओवैसी के इस बयान ने मुस्लिम मतदाताओं को लेकर समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की गणित को चुनौती दे दी है।

कौन हैं अब्दुल-अल-सयद?

अब्दुल-अल-सयद सारा के माता-पिता भारतीय मूल के है। लेकिन अब्दुल-अल-सयद की शिक्षा मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की है। इसके अलावा, रोड्, स्कॉलर के रूप में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। उनकी शादी सारा जकाकू से हुई से हुई है। अब्दुल खुद को पूंजीवादी बताते हैं। चुनाव में वह अपनी जीत से पहले प्रमुख अभियानों पर काफी ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। आम लोगों के जीवन की समस्याएं, महंगाई और अन्य परेशानियों को वह भली भांति समझते हैं।

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