जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार से सवाल किए हैं। हरियाणा के नूंह में आयोजित जमीयत के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन में उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी विदेशी नागरिक का गैरकानूनी तरीके से प्रवेश सही नहीं है। जो लोग कानूनी प्रक्रिया के तहत देश में आते हैं, उनके लिए अलग नियम हैं, जबकि अवैध रूप से आने वालों को वापस भेजा जाना चाहिए।

घुसपैठ रोकने में नाकामी पर सरकार को घेरा

मौलाना मदनी ने कहा कि अवैध रूप से देश में दाखिल होने वाले लोगों को बाहर निकालना जरूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है कि उन्हें देश में घुसने ही न दिया जाए, उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, तो फिर घुसपैठ रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं?

अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार विदेशी नागरिकों को भारत में आने से रोक नहीं पा रही है और इसके लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रही है, तो यह अपनी जिम्मेदारी से बचने जैसा है।

अपने भाषण में उन्होंने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, "अगर आप गैर मुल्कियों को इस देश में आने से रोक नहीं सकते तो, आपसे बड़ा गद्दार इस मुल्क में कोई नहीं है।"

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संसद में पेश किए गए थे घुसपैठ के आंकड़े

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में संसद में घुसपैठ से जुड़े आंकड़े पेश किए थे। इन आंकड़ों में सीमा पर घुसपैठ की कोशिशों के मामले शामिल थे। हालांकि, ये आंकड़े उन सभी लोगों की कुल संख्या नहीं बताते, जो बिना किसी की नजर में आए देश में दाखिल हो गए हों।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश की ओर से घुसपैठ की 7,528 कोशिशें दर्ज की गईं। वहीं पाकिस्तान से 420 और म्यांमार से 298 मामले सामने आए। नेपाल और भूटान से जुड़े मामलों की संयुक्त संख्या 157 रही। चीन की ओर से घुसपैठ का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।