देश में सरहद पर दुश्मनों को जवाब देने वाले एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह आज रिटायर हो रहे हैं। 25 महीने भारतीय वायुसेना की कमान संभालने वाले ए पी सिंह आज लड़ाकू विमानों को अलविंदा करेंगे। नई दिल्ली एयर फ़ोर्स स्टेशन पर इंडियन एयर फ़ोर्स आज उन्हें सेरेमोनियल गार्ड ऑफ़ ऑनर देगी। उनकी विदाई लीडरशिप पीरियड का अंत मनी जाएगी। जो ऑपरेशनल अग्रेसन और घरेलू हथियारों के लिए बड़े पैमाने पर ज़ोर देने के लिए तय की गई थी। एपी सिंह ने अपने बेहतरीन कार्यकाल के दौरान भारतीय एयर फोर्स को अगले 10 साल की लड़ाई के लिए स्ट्रक्चरल तोर पर तैयार करा है।

भारतीय वायु सेना की कमान आशुतोष दिक्षित संभालेंगे

ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व तेजस परियोजना को बढ़ावा, रक्षा तैयारियों पर बारिकी से तैयारी और 5000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव एयर चीफ एपी सिंह की देश की नाम बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। बता दें कि उनके बाद अब भारतीय वायु सेना की कमान आशुतोष दिक्षित संभालेंगे। भारतीय वायुसेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2019 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और वर्ष 2023 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया। उनके योगदान को भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण माना जाता है।

नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र

31 अक्‍टूबर 2026 को र‍िटायर हो रहे एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 21 दिसंबर 1984 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं, जिन्हें विभिन्न प्रकार के फिक्स्ड और रोटरी विंग विमानों पर 5,000 से अधिक घंटे उड़ान भरने का अनुभव है।

भारतीय एविएशन की काबिलियत का एक पब्लिक सपोर्ट

अपने सेरेमोनियल फेयरवेल के साथ 40 साल का मिलिट्री करियर खत्म हो रहा है। जाने वाले चीफ आखिरी बार वायु भवन में चीफ के तौर पर अपने समय के बाद गार्ड ऑफ ऑनर का इंस्पेक्शन करेंगे। वर्दी में उनके आखिरी हफ़्ते बहुत ही खास उड़ान के फ़ैसलों से भरे थे। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में जोधपुर के ऊपर देसी तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में अकेले उड़ान भरने का फ़ैसला किया। यह अकेले की उड़ान भारतीय एविएशन की काबिलियत का एक पब्लिक सपोर्ट थी। लेकिन, चीफ के तौर पर उनकी आखिरी उड़ान ने पूरे देश में सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा। उन्होंने किरण ट्रेनर एयरक्राफ्ट उड़ाने का फैसला किया।

2025 में ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर उनके कार्यकाल का सबसे अहम ऑपरेशनल पल मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर था। इंडियन एयर फ़ोर्स ने उनके डायरेक्ट कमांड में बड़े पैमाने पर क्रॉस-बॉर्डर स्ट्राइक किए। इन ऑपरेशन्स ने बहुत बड़े लेवल पर काम किया और मिलिट्री की तेज़ी से डिप्लॉयमेंट करने की काबिलियत को साबित किया। ये स्ट्राइक्स 1200 किलोमीटर चौड़ाई और 200 किलोमीटर गहराई तक फैली थीं। बाद में ACM AP सिंह ने इस मिशन की टैक्टिकल सफलता के बारे में खुलकर बात की।

कैपेबिलिटी-सेंट्रिक फ़ोर्स बनाने की जरूरत

उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि आज कोई भी टारगेट इंडियन एयर फ़ोर्स की पहुंच से बाहर नहीं है। उन्होंने इस ऑपरेशन का इस्तेमाल एक कैपेबिलिटी-सेंट्रिक फ़ोर्स बनाने की बहुत ज़रूरत को हाईलाइट करने के लिए किया। उन्होंने अपने बेस कमांडरों को लगातार याद दिलाया कि मिलिट्री की सफलता किसी एक वेपन सिस्टम पर निर्भर नहीं करती। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि पूरा नेटवर्क बहुत ज़्यादा मुकाबले वाले एयरस्पेस में एक साथ कैसे काम करता है।

एक शानदार सैन्य करियर

उनका मिलिट्री रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्हें दिसंबर 1984 में इंडियन एयर फ़ोर्स की फ़ाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उनका करियर मिलिट्री एविएशन में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजिकल विकास के दौर में फैला हुआ है। वे नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी और नेशनल डिफ़ेंस कॉलेज के एल्युम्नस हैं।

स्ट्रेटेजिक स्किल्स को बनाएंगे बेहतर

सरकार ने उनकी शानदार सेवा के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल दोनों से सम्मानित किया है। एयर चीफ का पद संभालने से पहले, उन्होंने कई अहम लीडरशिप रोल में अपनी स्ट्रेटेजिक स्किल्स को बेहतर बनाया। उन्होंने नई दिल्ली में वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के तौर पर काम किया। उन्होंने एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर सेंट्रल एयर कमांड को भी लीड किया, जहाँ उन्होंने मुश्किल लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल चुनौतियों को देखा।

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