नई दिल्ली: BRICS देशों के बीच गहन बातचीत के बाद शनिवार को संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बन गई। यह सहमति सुबह करीब 4 बजे तक चली लंबी बातचीत और कई दौर की कूटनीतिक चर्चा के बाद बनी।
सहमति बनाने में भारत की अहम भूमिका
कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय सामने आई। इसके बावजूद भारत ने लगातार बातचीत और परामर्श के जरिए विभिन्न पक्षों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
यह कूटनीतिक सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश शामिल हैं, जिनके बीच कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों को एक संयुक्त बयान पर सहमत कराना बड़ी चुनौती थी।
BRICS में संयुक्त बयान पर सहमति
भारत के प्रयासों से अलग-अलग भू-राजनीतिक रुख के बावजूद BRICS की प्रक्रिया पटरी से नहीं उतरी और संयुक्त बयान पर सहमति बन सकी।
BRICS प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीति के समन्वय और वैश्विक शासन पर साझा रुख बनाने का महत्वपूर्ण मंच है। इसका एजेंडा विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत मंडपम पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन
भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। भारत का जोर BRICS को विकास, स्थिरता और नवाचार पर केंद्रित एक रचनात्मक और समाधान-उन्मुख मंच के रूप में मजबूत करने पर है।
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