Amroha-Haridwar Ganga Expressway: अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जिले में विकास की उम्मीदें बढ़ गई हैं। करीब 116.85 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का लगभग 44 किलोमीटर हिस्सा अमरोहा जिले से होकर गुजरने का प्रस्ताव है। इसके लिए हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील के करीब 52 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में आने की संभावना है। वहीं, 950 से अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहित होने की उम्मीद है। यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला टी-प्वाइंट से जुड़ेगा और वहां से हरिद्वार तक जाएगा। इसके बनने के बाद अमरोहा की पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से कनेक्टिविटी पहले के मुकाबले काफी बेहतर होने की उम्मीद है।

मंगरौला से हरिद्वार तक बनेगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 116.85 किलोमीटर है। इसमें लगभग 44 किलोमीटर हिस्सा अमरोहा में होगा। मंगरौला टी-प्वाइंट से कनेक्ट होने के बाद यह मार्ग सीधे हरिद्वार की ओर जाएगा। इससे अमरोहा से हरिद्वार और उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों को तेज और बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

हसनपुर और मंडी धनौरा के 52 गांव दायरे में
अमरोहा में एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित रूट हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील के गांवों से होकर गुजरने की संभावना है। मंडी धनौरा क्षेत्र में अटारी, मुरीदपुर, मीरपुर, बल्दाना असगर अलीखा, बस्तौरी माफी, जलालपुर कलां, झनकपुरी, नगलिया बहादुरपुर, ब्रह्मपुर भूड़, यकबगड़ी, बस्तौरी, शेखूपुर शुमाली, रायपुर शुमाली, देहरा घनश्याम, छज्जूपुरा माफी, मोहम्मदी माफी, हासमपुर भूड़, कौराला, होशंगपुर उर्फ कटपुरा, कुआंखेड़ा, बेगपुर माफी, चक कुआं खेड़ा, भटौला शुमाली, पेली, खंडसाल, रछौटी, बंश गोपालपुर, बुद्धपुरा, डींगरा, पट्टीपुर माफी, हैबतपुर चौधरियान, पारा खालसा और वालीपुर समेत कई गांव शामिल हैं। वहीं, हसनपुर तहसील के रुखालू, शकरौली, गुलामपुर, भैंसरौली, बायखेड़ा, लुहारी खादर, सोहरका, दीपपुर, आगापुर कला, मछरई, याकूबपुर, सेमला, बसेड़ा खुर्द, आलमपुर, अब्दीपुर, पूठी और कटाई समेत अन्य गांव भी परियोजना के दायरे में आने की संभावना है।

950 से ज्यादा किसानों की जमीन आने की उम्मीद
परियोजना के लिए 950 से अधिक किसानों की जमीन अधिग्रहित होने की संभावना है। फिलहाल प्रशासन भूमि रिकॉर्ड की जांच में जुटा है। तहसील स्तर पर प्रस्तावित रूट में आने वाली गाटा संख्याओं का मिलान किया जा रहा है। इसके साथ ही जमीन के मालिकाना हक और दूसरे जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा रहा है।

सहमति और समझौते के आधार पर होगी प्रक्रिया
प्रशासन भूमि अधिग्रहण से पहले सभी रिकॉर्ड को दुरुस्त करना चाहता है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद या परेशानी न हो। शासन स्तर पर समिति गठित होने के बाद किसानों से सहमति और समझौते के आधार पर जमीन के बैनामे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

पांच लाख गाटा संख्याओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
जिले में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल करने का काम भी पूरा किया जा चुका है। निबंधन विभाग के अनुसार करीब पांच लाख गाटा संख्याओं का डेटा फीड किया जा चुका है। इससे एक्सप्रेसवे के लिए चिन्हित जमीन के रिकॉर्ड की ऑनलाइन और व्यवस्थित तरीके से जांच करने में मदद मिलेगी।

सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी
एक्सप्रेसवे की जद में आने वाले गांवों समेत जिलेभर में सर्किल रेट बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इस पर लोगों से 25 अगस्त तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। प्राप्त आपत्तियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एक्सप्रेसवे से कारोबार और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे के बनने से केवल यात्रा ही आसान नहीं होगी, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। अमरोहा से हरिद्वार और उत्तराखंड तक तेज कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा किसानों के कृषि उत्पाद और स्थानीय उद्योगों का सामान दूसरे शहरों तक कम समय में पहुंच सकेगा। बेहतर सड़क संपर्क से निवेश, कारोबार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह एक्सप्रेसवे अमरोहा को पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी कॉरिडोर के रूप में मजबूत कर सकता है। 

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