Ramayana Part 1 Movie Review: जिस फिल्म का दर्शकों को लंबे समय से इंतजार था, आखिरकार वह सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' अपनी भव्यता, शानदार स्टारकास्ट और 4000 करोड़ रुपये के कथित बजट को लेकर पहले से ही चर्चा में थी। आदिपुरुष के निराशाजनक अनुभव के बाद दर्शकों के मन में इस फिल्म को लेकर कई सवाल थे। लेकिन क्या नितेश तिवारी इन उम्मीदों पर खरे उतर पाए हैं? आइए जानते हैं।
रावण की कहानी से होती है शुरुआत
आमतौर पर रामायण की कहानी भगवान राम के जन्म और अयोध्या से शुरू होती है, लेकिन नितेश तिवारी ने इसे एक अलग अंदाज में पेश किया है। फिल्म की शुरुआत रावण के कुल, उसकी तपस्या और ब्रह्मा-शिव से मिले वरदानों से होती है। इसके बाद रावण के बढ़ते अधर्म और अत्याचार के बीच भगवान विष्णु राम के रूप में अवतार लेते हैं। कहानी राम के बचपन, विश्वामित्र से शिक्षा, ताड़का वध, सीता स्वयंवर और फिर कैकेयी के दो वरदानों के कारण हुए वनवास तक पहुंचती है। फिल्म में सीता हरण और जटायु-रावण के युद्ध तक की कहानी दिखाई गई है।
नितेश तिवारी ने भावनाओं से जीता दिल
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके इमोशनल सीन्स हैं। नितेश तिवारी इससे पहले दंगल और छिछोरे जैसी फिल्में बना चुके हैं और भावनाओं को पर्दे पर उतारने की उनकी कला यहां भी नजर आती है। राम का वनवास, पिता दशरथ से बिछड़ना और सीता हरण जैसे दृश्य दर्शकों को भावुक करते हैं। फिल्म का पहला हाफ काफी दमदार है, जबकि दूसरा हाफ थोड़ा खिंचा हुआ महसूस होता है। हालांकि क्लाइमैक्स तक आते-आते फिल्म अपनी पकड़ वापस बना लेती है।
शानदार विजुअल्स और दमदार म्यूजिक
रामायण के विजुअल्स इसकी सबसे बड़ी खासियत हैं। अयोध्या, मिथिला, लंका और देवलोक को भव्य तरीके से दिखाया गया है। हालांकि कुछ दानवों के VFX थोड़े अधूरे लगते हैं और ग्रीन स्क्रीन का इस्तेमाल कुछ दृश्यों में साफ नजर आता है। वहीं, हांस जिमर और एआर रहमान का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को अलग ऊंचाई देता है। खासकर राम के वनवास वाला दृश्य संगीत की वजह से और प्रभावशाली बन जाता है।
यश ने लूटी महफिल, रणबीर-साई का मिला-जुला प्रदर्शन
रणबीर कपूर ने भगवान राम की सादगी और शांति को पर्दे पर उतारने की अच्छी कोशिश की है। हालांकि उनसे और बेहतर अभिनय की उम्मीद थी। साई पल्लवी सीता के रूप में खूबसूरत लगती हैं, लेकिन उनके किरदार के भावनात्मक पहलू उतने प्रभावशाली नहीं बन पाते। रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में शानदार हैं, जबकि रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा के किरदार में उम्मीद से बेहतर नजर आती हैं। अरुण गोविल को राजा दशरथ के रूप में देखना भी सुखद अनुभव है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित यश करते हैं। रावण के रूप में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस जबरदस्त है। उनका अभिनय, अंदाज और संवाद अदायगी फिल्म को खास बनाते हैं।
रामायण की कहानी क्यों है भव्य ?
कुल मिलाकर नितेश तिवारी की रामायण एक भव्य सिनेमाई अनुभव है। कुछ कमजोर VFX, खिंचा हुआ दूसरा हाफ और कलाकारों के बीच थोड़ी कम केमिस्ट्री के बावजूद फिल्म अपनी भावनाओं, संगीत और शानदार विजुअल्स से प्रभावित करती है। अगर आप रामायण की कहानी को बड़े पर्दे पर भव्य अंदाज में देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म जरूर देख सकते हैं।
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