Pakistan News: पाकिस्तान में प्रेस की आजादी और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। देश में पत्रकारों को धमकियों, शारीरिक हमलों और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच इस्लामाबाद स्थित मीडिया निगरानी संस्था फ्रीडम नेटवर्क (Freedom Network) की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पत्रकारों के खिलाफ दर्ज घटनाओं में भले ही कमी आई हो, लेकिन उनकी सुरक्षा की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, 'From Violence to Lawfare: Process as Punishment for Journalists' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के खिलाफ हुई घटनाओं का विश्लेषण किया गया है। इंप्यूनिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, पाकिस्तान में हर महीने औसतन करीब 10 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें पत्रकारों को निशाना बनाया गया।
यह रिपोर्ट इंटरनेशनल मीडिया सपोर्ट (IMS) के तकनीकी सहयोग से तैयार की गई है। इसे पत्रकार अदनान रहमत और फ्रीडम नेटवर्क के कार्यकारी निदेशक इकबाल खट्टक ने लिखा है। रिपोर्ट को 2 नवंबर को मनाए जाने वाले 'पत्रकारों के खिलाफ अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस' से पहले जारी किया गया।
पत्रकारों के खिलाफ हमलों और धमकियों के चौंकाने वाले आंकड़े
रिपोर्ट में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ कई तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें पेशेवर काम के सिलसिले में एक पत्रकार की हत्या, हत्या की तीन कोशिशें, हिंसा की 18 धमकियां और 11 शारीरिक हमले शामिल हैं।
इसके अलावा पत्रकारों के खिलाफ 13 कानूनी कार्यवाहियां और कानूनी कार्रवाई की 32 धमकियां भी दर्ज की गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा 49 घटनाएं पंजाब प्रांत में सामने आईं, जो दर्ज मामलों के आधे से अधिक हैं। इसके बाद खैबर पख्तूनख्वा, इस्लामाबाद और बलूचिस्तान का स्थान रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकार विशेष रूप से निशाने पर रहे। पीड़ित पत्रकारों और उनके परिवारों ने आरोप लगाया कि करीब दो-तिहाई घटनाओं के पीछे सरकारी अधिकारी और प्रशासनिक तंत्र के लोग जिम्मेदार थे।
PECA कानून के इस्तेमाल पर उठे सवाल
रिपोर्ट में पाकिस्तान के विवादित प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) पर आरोप है कि वह साइबर अपराध से जुड़ी कानूनी कार्यवाहियों के जरिए आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को निशाना बना रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार, सरकारी खर्च और अधिकारियों के कामकाज से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के खिलाफ मानहानि, गलत जानकारी फैलाने, उत्पीड़न और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के साथ-साथ कानूनी दबाव भी प्रेस की स्वतंत्रता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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