Pakistan: पड़ोसी मुल्क एक बार फिर आर्थिक बदहाली और खाद्य संकट को लेकर चर्चा में है। आवाम महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों के बढ़ते खर्च से जूझ रही है। कई परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती बनता जा रहा है। इसके इतर सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए फंड के इस्तेमाल को लेकर शहबाज शरीफ सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।

आटा, दाल, गैस के दाम आसमान छू रहे है। वहीं अब खबर सामने आ रही है कि शहबाज सरकार आवाम को दरकिनार करके हथियार खरीदने में लगी हुई है। हालांकि कंगाल पाकिस्तान से क्या ही उम्मीद की जा सकती है। आइए जानते है क्या है पूरी कहानी।

हुकूमत को रोटी से ज्यादा हथियारों का शोक

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने बजट में सैन्य साजो-सामान पर खर्च को प्राथमिकता दी है, जबकि लोगों के बीच बढ़ती भूख और कुपोषण के बावजूद भोजन और स्वास्थ्य के लिए आवंटित राशि में कटौती की है।

2026-27 के संघीय बजट में रक्षा सेवाओं के लिए 3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (PKR) आवंटित किए गए हैं, जो 17.6 प्रतिशत की वृद्धि है। इसमें हथियारों की खरीद के लिए आवंटित राशि 39.6 प्रतिशत बढ़कर 925.8 बिलियन पाकिस्तानी रुपये हो गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 53.3 बिलियन पाकिस्तानी रुपये दिए गए हैं, जिसमें से 24.3 बिलियन पाकिस्तानी रुपये का उपयोग स्वास्थ्य और पोषण विकास से जुड़े सभी कार्यों के लिए किया जाएगा। 'यूरोपियन टाइम्स' न्यूज़ पोर्टल के एक लेख के अनुसार, सैन्य पेंशन के लिए अलग से 822 बिलियन पाकिस्तानी रुपये रखे गए हैं, जो स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित कुल राशि से 15 गुना से भी अधिक है। हालांकि यह नया नहीं पाकिस्तान की ये पुराना इतिहास रहा है।

भूख से बिलखती पाकिस्तान की आवाम

एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान का स्कोर 25.5 रहा, जिससे वह 122 देशों की सूची में 106वें स्थान पर आ गया है। यह दक्षिण एशिया के सभी सक्रिय देशों में सबसे खराब स्थिति है। श्रीलंका, जिसने 2022 में अपने सरकारी कर्ज पर डिफॉल्ट किया था और उसके बाद के साल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के तहत बिताए, उसका स्कोर 10.2 रहा। अब दक्षिण एशिया में सबसे कम भुखमरी श्रीलंका में ही है। बांग्लादेश का स्कोर 19.2 और नेपाल का 14.5 रहा। जो कि मध्यम स्तर है। जबकि भारत का स्कोर 24.1 रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है, "पाकिस्तान में भुखमरी की स्थिति बिगड़ने के पीछे कोई बाहरी झटका जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि पड़ोसी देशों ने, जो समान जलवायु और वस्तुओं की कीमतों का सामना कर रहे हैं, खुद को इस स्थिति से बचा लिया है।" अगर पाकिस्तान की इतिहास देखे तो कई सबसे अमीर वहां के सैन्य अधिकारी ही होते है।

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