Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी धीरे-धीरे तेज होने लगी है। इसी बीच TNP NEWS का खास चुनावी अभियान '27 की सत्ता' राजधानी लखनऊ की लखनऊ मध्य विधानसभा सीट पहुंचा। यहां टीम ने जनता के बीच जाकर सड़क, बिजली, पानी, सफाई, रोजगार, ट्रैफिक जाम और जलभराव जैसे बुनियादी मुद्दों पर लोगों की राय जानी। साथ ही यह समझने की कोशिश की कि मौजूदा विधायक के कामकाज से क्षेत्र की जनता कितनी संतुष्ट है और आगामी चुनाव में मतदाताओं के मन में क्या चल रहा है।
लखनऊ मध्य की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आएगा कि विकास के दावों और जमीनी समस्याओं के बीच जनता किसे कितना अंक देती है। क्या मौजूदा विधायक के काम से लोग खुश हैं या बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं? इन सवालों के जवाब 2027 के चुनावी समीकरणों को समझने में अहम हो सकते हैं।
लखनऊ मध्य विधानसभा सीट का राजनीतिक समीकरण
लखनऊ मध्य उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से एक है। यह विधानसभा क्षेत्र सीट संख्या 174 के रूप में जाना जाता है। शहरी स्वरूप वाली इस सीट पर अलग-अलग जातियों और समुदायों के मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। यहां मुस्लिम, वैश्य, कायस्थ, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की अहम भूमिका मानी जाती है।
इस सीट पर पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के रविदास मेहरोत्रा ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 के चुनाव में बीजेपी के ब्रजेश पाठक विधायक बने। वहीं 2022 में रविदास मेहरोत्रा ने एक बार फिर जीत हासिल कर सपा का परचम लहराया।
2022 में रविदास मेहरोत्रा ने 10,935 वोटों से दर्ज की थी जीत
विधानसभा चुनाव 2022 में लखनऊ मध्य सीट पर मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच रहा। सपा प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा को कुल 1,04,488 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार रजनीश कुमार गुप्ता को 93,553 मत प्राप्त हुए।
रविदास मेहरोत्रा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी रजनीश कुमार गुप्ता को 10,935 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के आशीष चंद्र 6,181 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार दिलप्रीत सिंह विर्क को 2,927 वोट मिले।
इस नतीजे ने साफ किया कि लखनऊ मध्य में बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला कितना करीबी रहा। ऐसे में 2027 के चुनाव में दोनों दलों की रणनीति और जनता का रुझान काफी अहम होगा।
लखनऊ मध्य में किन समुदायों के मतदाता अहम?
लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न समुदायों की मिश्रित आबादी है। उपलब्ध अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, यहां मुस्लिम समुदाय के करीब 90 हजार और वैश्य, तेली व भुर्जी समुदाय के लगभग 80 हजार मतदाता माने जाते हैं।
इसके अलावा कायस्थ समुदाय की अनुमानित आबादी 45 से 50 हजार, ब्राह्मण समुदाय की 40 से 45 हजार और खटीक, धानुक व सोनकर समुदाय की करीब 25 से 35 हजार बताई जाती है। अन्य अनुसूचित जाति समुदायों की आबादी भी चुनावी समीकरण में भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, ये आंकड़े अनुमानित हैं। इन्हें आधिकारिक मतदाता सूची या प्रमाणित जातिगत जनगणना का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। चुनाव में जातीय समीकरणों के साथ स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि और विकास कार्य भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
2012 से 2022 तक बदलता रहा चुनावी मिजाज
लखनऊ मध्य विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास दिलचस्प रहा है। वर्ष 2012 में सपा के रविदास मेहरोत्रा ने जीत हासिल की। 2017 में बीजेपी के ब्रजेश पाठक ने इस सीट पर कब्जा जमाया, जबकि 2022 में रविदास मेहरोत्रा ने फिर जीत दर्ज की।
इस राजनीतिक बदलाव के बीच बीजेपी और सपा दोनों के लिए यह सीट अहम बनी हुई है। बीजेपी जहां दोबारा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी, वहीं सपा के सामने अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति और जीत को बरकरार रखने की चुनौती होगी।
2027 में विकास, रोजगार और स्थानीय समस्याएं बनेंगे बड़े मुद्दे?
लखनऊ मध्य एक शहरी विधानसभा क्षेत्र है, जहां सड़क, बिजली, पानी, सफाई, ट्रैफिक व्यवस्था और जलभराव जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास कार्य भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकते हैं।
TNP NEWS के चुनावी अभियान '27 की सत्ता' के तहत इन सभी मुद्दों पर जनता की राय जानने की कोशिश की गई है। अब देखना होगा कि मौजूदा विधायक के कामकाज को लेकर लोगों का क्या आकलन है और 2027 के चुनाव में लखनऊ मध्य की जनता किस मुद्दे को सबसे ज्यादा महत्व देती है।
लखनऊ मध्य की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट देखिए और जानिए 2027 के चुनाव से पहले जनता के मन में क्या है?