Pakistan: पड़ोसी मुल्क में महंगाई और गैस की किल्लत ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि रावलपिंडी जैसे बड़े शहरों में कई परिवार LPG सिलेंडर और पाइपलाइन गैस की जगह लकड़ी और कोयले से खाना पकाने को मजबूर हैं।

कभी आधुनिक रसोई में गैस चूल्हे का इस्तेमाल करने वाले परिवार अब पुराने जमाने के चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। भारत से बराबरी करने वाला पाकिस्तान 20 साल पीछे पहुंच चुका है। चलिए आपको बताते है पूरी कहानी।

पाकिस्तान में क्यों लौट रहे हैं लकड़ी और कोयले वाले चूल्हे?

कम और मध्यम आय वाले परिवारों, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों और छोटे तंदूरों ने ईंधन के रूप में लकड़ी, कोयले और केरोसिन तेल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही लकड़ी और कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है।

पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, कोयला 800 से 1,000 पाकिस्तानी रुपये (PKR) प्रति मन बिक रहा है, जबकि सूखी लकड़ी 1500 से 1800 PKR प्रति मन के भाव पर मिल रही है। लकड़ी के बुरादे की कीमत भी बढ़कर 700 PKR प्रति मन हो गई है।

गैस की आपूर्ति दिन में तीन बार, दो-दो घंटे के लिए की जा रही है। वहीं, रात 9 बजे से सुबह तक लगातार गैस की कटौती होती है, जिसके कारण व्यापारियों, दुकानदारों और संपन्न परिवारों को गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडरों की बढ़ती मांग ने इनकी कीमतों को और बढ़ा दिया है।

20 साल पीछे पहुंचा कंगाल मुल्क पाकिस्तान

एआई और हाईटैक जमाने में कंगाल मुल्क पाकिस्तान की हालत लगातार पतली होती जा रही है। खाने-पीने के चीजों के दाम आसमान छू रहे है। आलम यह है कि एक बार फिर कंगाल पाकिस्तान 20 साल पीछे पहुंच चुका है।

एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच लोग अब मिट्टी के चूल्हे में खाने बनाने के लिए मजबूर है। इसके अलावा आटे की कीमत लगातार आसमान छू रही है। यहां तक की, खाने-पीने की सभी चीजें के दाम इतने ज्यादा बढ़ गए है कि आम लोगों के खरीदना तक मुश्किल हो चुका है।

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