Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ हवा के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत हुए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। लखनऊ को 200 में से 198 अंक मिले हैं। यह रैंकिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की आधिकारिक रिपोर्ट में जारी की गई है।
इंदौर को पछाड़कर नंबर-1 बना लखनऊ
पिछले साल बेहतर प्रदर्शन करने वाला इंदौर इस बार 197 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं मध्य प्रदेश का जबलपुर 195 अंक लेकर तीसरे नंबर पर रहा। भोपाल और आगरा ने 192-192 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से चौथा स्थान पाया। सूरत 191 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
देश के टॉप-10 शहरों की पूरी लिस्ट
CPCB की रिपोर्ट के मुताबिक 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टॉप-10 इस तरह हैं:
| रैंक | शहर | स्कोर |
| 1 | लखनऊ | 198 |
| 2 | इंदौर | 197 |
| 3 | जबलपुर | 195 |
| 4 | भोपाल | 192 |
| 4 | आगरा | 192 |
| 5 | सूरत | 191 |
| 6 | रायपुर | 189 |
| 7 | ठाणे | 187 |
| 7 | चंडीगढ़ | 187 |
| 7 | राजकोट | 187 |
लखनऊ को क्यों मिला पहला स्थान?
सर्वेक्षण में सिर्फ हवा में मौजूद प्रदूषण को नहीं देखा गया। शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए जमीन पर किए गए काम, शहर की कार्ययोजना, कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास और PM10 में सुधार जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। लखनऊ में सड़क की धूल कम करने के लिए यांत्रिक सफाई, कचरा प्रबंधन में सुधार, हरित क्षेत्र बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल जैसे कदमों को भी सर्वेक्षण में महत्व मिला। शहर का वार्षिक औसत PM10 स्तर 2017-18 के 253 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटकर 2025-26 में 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यानी करीब 46.64 फीसदी सुधार दर्ज किया गया।
कूड़ा उठाने के लिए लगाए 1,100 इलेक्ट्रिक वाहन
लखनऊ की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले सर्वेक्षण यानी 2024-25 में लखनऊ 15वें स्थान पर था। अब एक साल में लंबी छलांग लगाते हुए शहर सीधे पहले पायदान पर पहुंच गया है। नगर निगम ने प्रदूषण कम करने के लिए शहर में कई स्तरों पर काम किया। घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए 1,100 इलेक्ट्रिक वाहन लगाए गए हैं। संकरी गलियों में कूड़ा उठाने के लिए ई-ऑटो टिपर भी चलाए जा रहे हैं। इन वाहनों पर जीपीएस के जरिए नजर रखी जा रही है।
लखनऊ नगर निगम को मिला 1.50 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र
केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए इस सर्वेक्षण में लखनऊ ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। पिछले कई सालों से इस श्रेणी में आगे रहने वाला मध्य प्रदेश का इंदौर इस बार दूसरे नंबर पर रहा, जबकि जबलपुर को तीसरा स्थान मिला। इस उपलब्धि के लिए 1.50 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया गया। खास बात यह है कि सिर्फ लखनऊ शहर ही नहीं, बल्कि शहर का पेपर मिल कॉलोनी वार्ड भी राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल रहा। 30 हजार से ज्यादा आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में पेपर मिल कॉलोनी को देश का सबसे अच्छा वार्ड चुना गया। इसके लिए वार्ड को 50 लाख रुपये का पुरस्कार मिला।
मेयर समेत कई अधिकारियों को किया गया सम्मानित
वहीं इस समारोह में लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार समेत नगर निगम के अधिकारियों को सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने के बाद मेयर सुषमा खर्कवाल ने इसे पूरे लखनऊ के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा के मार्गदर्शन, नगर निगम के सफाई कर्मचारियों, अधिकारियों और शहरवासियों की मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम आगे भी इसी तरह काम करता रहेगा, ताकि लखनऊ को और ज्यादा स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।
यूपी के कई शहरों का शानदार प्रदर्शन
लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। आगरा चौथे, गाजियाबाद नौवें और कानपुर 11वें स्थान पर रहा। प्रयागराज 13वें स्थान पर रहा, जबकि मेरठ 22वें स्थान पर है। वहीं 3 से 10 लाख आबादी वाली श्रेणी में फिरोजाबाद ने दूसरा और झांसी ने पांचवां स्थान हासिल किया।
दिल्ली और मुंबई की स्थिति क्या रही?
बड़े शहरों की बात करें तो दिल्ली इस श्रेणी में 21वें स्थान पर रही, जबकि मुंबई 28वें स्थान पर रही। यानी इस सर्वेक्षण में लखनऊ ने कई बड़े महानगरों को पीछे छोड़ दिया।
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