जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाने की परंपरा कई घरों में श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। इस अवसर पर भक्त लड्डू गोपाल का विधि-विधान से अभिषेक करते हैं, उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाते हैं और तरह-तरह के पकवानों का भोग अर्पित करते हैं। कई परिवारों में इस दिन कढ़ी-चावल समेत पारंपरिक व्यंजन बनाने की भी मान्यता है। कृष्ण छठी से जुड़ी एक दिलचस्प लोकपरंपरा कागज और कलम रखने की भी है। पूजा स्थल के पास रात में एक कोरा कागज और कलम रखी जाती है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसा क्यों किया जाता है और क्या उस कागज पर कुछ लिखना चाहिए?
छठी की रात भाग्य लिखने की मान्यता
भारतीय परंपराओं में बच्चे के जन्म के छठे दिन को विशेष महत्व दिया गया है। लोकविश्वास के अनुसार, छठी की रात षष्ठी माता या विधाता नवजात के जीवन से जुड़े भाग्य का लेख लिखने आती हैं। इसी मान्यता के कारण कुछ क्षेत्रों में बच्चे की छठी के अवसर पर कागज, कलम और दवात जैसी चीजें पूजा स्थान के पास रखने की परंपरा रही है। श्रीकृष्ण की छठी में भी इसी लोकविश्वास की झलक देखने को मिलती है। भक्त भगवान कृष्ण को बालक के रूप में मानकर उनके जन्म के बाद छठे दिन यह उत्सव मनाते हैं। इसलिए नवजात शिशु की छठी से जुड़ी कुछ परंपराएं कृष्ण छठी में भी अपनाई जाती हैं।
कागज को खाली रखने का क्या अर्थ है?
इस परंपरा में कोरा कागज रखना अपने आप में एक प्रतीक माना जाता है। इसका भाव यह है कि जीवन का भविष्य अभी अनलिखा है और उसे मनुष्य अपनी इच्छा से तय नहीं करता। इसलिए कई परिवार कागज पर पहले से कुछ भी नहीं लिखते और उसे कलम के साथ लड्डू गोपाल के पास रख देते हैं। दीपक जलाकर भगवान से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार के मंगल की प्रार्थना की जाती है। हालांकि हर स्थान पर एक जैसी परंपरा नहीं है। कुछ परिवार कागज पर 'श्रीकृष्ण', 'श्रीहरि' या स्वस्तिक का शुभ चिह्न बनाते हैं। इसलिए खाली कागज रखना और उस पर शुभ प्रतीक बनाना, दोनों ही क्षेत्रीय लोकाचार का हिस्सा हो सकते हैं।
क्या कागज और कलम रखना जरूरी है?
कृष्ण छठी के दिन कागज और कलम रखना कोई ऐसा अनिवार्य शास्त्रीय विधान नहीं है, जिसे हर भक्त के लिए करना जरूरी हो। यह मुख्य रूप से लोकपरंपरा है, जिसका संबंध नवजात शिशु की छठी और षष्ठी माता से जुड़े विश्वासों से माना जाता है। इसलिए यदि किसी परिवार में यह परंपरा नहीं निभाई जाती, तो केवल इसके कारण कृष्ण छठी की पूजा अधूरी नहीं मानी जाती। इस उत्सव में सबसे महत्वपूर्ण भगवान के बाल स्वरूप के प्रति प्रेम, श्रद्धा और भक्ति है।
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पूजा के बाद कागज का क्या करें?
जो लोग यह परंपरा निभाना चाहते हैं, वे साफ-सफाई के बाद लड्डू गोपाल के पास एक स्वच्छ कागज और कलम रख सकते हैं। इन्हें सीधे भगवान के चरणों में रखने के बजाय पास की साफ चौकी या थाली में रखना बेहतर माना जा सकता है। पूजा के बाद कागज को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा जा सकता है। उसे कूड़े में फेंकने की आवश्यकता नहीं है। यदि उस पर कोई शुभ नाम या चिह्न बनाया गया है, तो उसे पूजा की सामग्री के साथ रखा जा सकता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। TNP News इसकी पुष्टि नहीं करता है।)