Asha Bhosle 93rd Birthday : इन आंखों की मस्ती के...! इस गाने को आवाज देने वाली और भारतीय संगीत जगत में सुरीली आवाज की छाप छोड़ने वाली आशा भोंसले का आज 93वां जन्मदिन है। यह पहला साल है कि जब आशा भोंसले हमारे बीच मौजूद है। आज भी संगीत की दुनिया में आशा भोंसले के सुरों का जादू करोड़ों दिलों की धड़कन और संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है। आशा भोंसले का संगीत करियर 7 से आठ दशकों का लंबा सफर उन्होंने तय किया। रोमांटिक गानों से लेकर पेप्पी और शास्त्रीय गज़ल तक हर विधा में आशा भोंसले को महारत हासिल थी। आशा भोंसले को लोग प्यार से आशा ताई भी बोलते थे। उन्होंने 20 से भी ज्यादा भाषाओं में हजारों गीत गाए हैं। आशा भोंसले का नाम साल 2011 में इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली गायिका के तौर पर Guinness World Records में दर्ज है। सुरों की मल्लिका आशा भोंसले के सुरीले सफर की बात की जाए तो उनके जीवन में कई गीत ऐसे हैं, जो आज की जनरेशन भी गुनगुनाती हुई दिखाई देती है। ऐ मेरे दिल के चैन,आज भी लोगों के दिलों में छाया हुआ है।
पिता के निधन से परिवार पर आया आर्थिक संकट
हिंदी सिनेमा में संगीत की दुनिया में 8 दशकों तक अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली दिवंगत आशा भोंसले का आज 93वां जन्मदिन है। 12 अप्रैल को आशा भोंसले ने इस दुनिया को भले ही अलविदा कह दिया था, लेकिन उनके गीत आज भी उनकी यादें ताजा करते हैं। अपनी सुरीली आवाज के दम पर आशा भोंसले ने संगीत जगत को न केवल अपने लाजवाब नगमें दिए। बल्कि अपने गीतों के जरिए अलग ही अंदाज में अपनी बात कहने की प्रतिक्रिया को भी समझाया। दरअसल आशा भोंसले के जीवन में 9 साल की उम्र से ही उतार चढ़ाव आए। जिस समय वह 9 वर्ष की थीं, उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर जो मशहूर थिएटर एक्टर के साथ-साथ क्लासिकल सिंगर भी थे उनका देहांत हो गया था। मंगेशकर परिवार पर अचानक से आर्थिक संकट आ गया। परिवार पुणे और कोल्हापुर में कुछ दिन रहने के बाद मुंबई में आया।
बहन लता मंगेश्कर ने दिया मां का प्यार
कम उम्र में ही अपनी 14 वर्षीय बड़ी बहन लता मंगेश्कर के साथ आशा भोंसले ने संगीत की दुनिया में अपना पहला कदम रखा। घर पर ही रहकर उन्होंने 10 साल की उम्र से ही गाना शुरु कर दिया था। घर पर सुरों के साथ शास्त्रीय महफिल सजती थी। क्योंकि बचपन से ही आशा भोंसले अपनी बड़ी बहन लता मंगेश्कर के साथ उनकी परछाई बनकर उनके पीछे रहती थीं। लता मंगेश्कर भी बड़ी बहन का फर्ज बखूबी निभाती थी। वह अपनी छोटी बहन आशा को गोद में लेकर घुमती थी। एक बार लता मंगेश्कर अपने साथ आशा भोंसले को भी स्कूल ले गई, जहां शिक्षक ने इसका विरोध किया लेकिन लता मंगेश्कर ने आशा भोंसले को अपने से दूर नहीं किया।
10 साल की उम्र में ही संगीत की दुनिया में रखा कदम
संगीत की दुनिया में लता मंगेश्कर के साथ-साथ आशा भोंसले भी एक गायिका बन गई थीं, और उन्होंने अपना पहला गाना मराठी फिल्म मझा बल के लिए चला चला नव बाला को अपनी आवाज दी। यह गाना आशा भोंसले ने साल 1943 में गाया था। उस दौरान आशा भोंसले की उम्र महज 10 साल थी। आगे सफर तय करते हुए आशा भोंसले ने हिंदू व अन्य भाषाओं में भी कई गाने गाए। लोकगीत से लेकर गजल, शास्त्रीय संगीत, कव्वाली और बॉलीवड़ में उनके गाने आज भी लोगों को याद हैं।
संघर्ष का भी किया सामना
मशहूर सिंगर की बेटी होने के कारण के बाद भी आशा भोंसले को संगीत की दुनिया में कदम रखने के दौरान काफी संघर्ष करना पड़ा। उस दौरान गीता दत्त, शमशाद बेगम, लता मंगेश्कल का काफी नाम था। ऐसे में अगर यह तीनों किसी गाने को छोड़ देते थे, तो वह गाने को आवाज देने का मौका आशा भोंसले को मिलता था। 50 के दशक में आशा भोंसले वैम्पस, बैड गर्ल्स या सेकंड ग्रेड फिल्मों के गानों में आशा भोंसले ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। कुछ लोगों ने एक अफवाह भी उड़ाई थी कि आशा ताई अपनी बड़ी बहन लता मंगेश्कर को अपना प्रतिद्वंद्वी मानती थी।
जब बड़ी बहन पर चिल्लाई थी आशा
एक बार म्यूजिक कंपोजर शंकर जयकिशन ने दोनों बहनों को गाना कर गया रे मुझपे जादू... ऑफर किया था। यह गाना फिल्म बसंत विहार के लिए गाया जाना था। दो राग भैरवी पर आधारित था। जिस दिन रिकॉर्डिंग होनी थी, उसी दिन के लिए आशा भोंसले स्टूडियो जाने के लिए तैयार हुई। लेकिन लता मंगेश्कर अपना रियाज कर रही थीं। आशा भोंसले इस मौके को गंवाना नहीं चाहती थी। 1 घंटा इंतजार करने के बाद भी तला दीदी नहीं आई तो आशा भोंसले रिहर्सल रुम में गई और बड़ी बहन लता पर जोर से चिल्ला पड़ी। लेकिन लता मंगेश्कर ने अपनी प्यारी सी मुस्कान दी और उनके साथ चली गई।
16 साल की उम्र में परिवार के खिलाफ जाकर की पहली शादी
दरअसल आशा भोंसले ने 16 साल की उम्र में परिवार के खिलाफ जाकर अपनी बड़ी बहन लता मंगेश्कर के पर्सनल सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से शादी की थी। गणपत राव की उम्र उस समय 31 साल थी। लेकिन शादी के कुछ समय बाद आशा भोंसले के जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गणपत राव और उनका भाई आशा से मारपीट करते थे। इतना ही गणपत के परिवार वाले आशा को उनके परिजनों से भी नहीं मिलने देते थे। आशा ने लता भोंसले से कई बार मिलने की कोशिश की लेकिन वह हर बार मारपीट का शिकार होती थी। लेकिन जब आशा भोंसले के सब्र का बांध टूटा तो वह साल 1960 में अपने दोनों बच्चों के साथ अपनी मां के घर वापस आई। आशा उस समय प्रेग्नेंट थीं। बड़ी बहन लता मंगेश्कर ने भी उन्हें अपने पास रहने की जगह दी।
आरडी बर्मन के साथ की दूसरी शादी
मां के घर वापस आने के बाद आशा भोंसले ने फिर से गाना शुरु कर दिया था। इसी बीत उनकी मुलाकात राहुल देव बर्मन यानी आरडी बर्मन से हुई। दोनों ने एक साथ कई गाने गाए। साल 1980 में दोनों ने शादी की। आरडी बर्मन, आशा जी से 6 साल छोटे थे। उनकी भी पहली शादी टूट गई थी। लेकिन आशा की यह शादी सफल रही। आरडी बर्मन ने अपनी आखिरी सांस तक आशा भोंसले का साथ निभाया। आशा भोसले और पंचम दा की शादी का सफर भले ही छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत रहा। 54 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के कारण पंचम दा का निधन हो गया था।
गोरिल्लाज के साथ आशा ताई का आखिरी गाना
92 साल की उम्र में आशा भोसले का आखिरी गाना गोरिल्लाज के साथ रिकॉर्ड हुआ था। 'द शैडोई लाइट' नाम का ट्रैक, 27 फरवरी 2026 को रिलीज हुआ था। यह गाना आशा ताई ने गोरिल्लाज एल्बम के लिए गाया था। यूट्यूब पर इस गाने को लाखों व्यूज मिल चुके हैं।
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