Lucknow IT City: लखनऊ में आईटी सिटी और वरुण विहार आवासीय योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) अब दोनों योजनाओं के लिए लैंड पूलिंग के साथ भूमि अधिग्रहण का रास्ता अपनाएगा। सुलतानपुर रोड और किसान पथ के आसपास विकसित होने वाली इन योजनाओं में जो किसान स्वेच्छा से लैंड पूलिंग के तहत जमीन नहीं देंगे, उनकी भूमि अधिग्रहित की जा सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को सर्किल रेट का चार गुना और शहरी क्षेत्र में दो गुना मुआवजा देने का प्रावधान बताया गया है।

3490 एकड़ में विकसित होगी IT सिटी आवासीय योजना
लखनऊ में प्रस्तावित आईटी सिटी आवासीय योजना करीब 3490 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जानी है। एलडीए अब तक लगभग 1600 एकड़ भूमि लैंड पूलिंग के माध्यम से हासिल कर चुका है। वहीं, करीब 800 एकड़ जमीन के लिए किसानों की ओर से अपेक्षित गति से सहमति नहीं मिल रही है।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक, जो किसान लैंड पूलिंग के तहत जमीन देने के लिए आगे नहीं आएंगे, उनकी भूमि के अधिग्रहण पर विचार किया जाएगा। योजना के लिए लगभग 1000 एकड़ सरकारी भूमि भी उपलब्ध है, जिसे नियमानुसार पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया से प्राप्त किया जाएगा।

किसानों को कैसे मिलेगा मुआवजा?
आईटी सिटी और वरुण विहार योजनाओं के लिए भूमि जुटाने में एलडीए लैंड पूलिंग और अधिग्रहण, दोनों विकल्पों पर काम कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र: सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा।
शहरी क्षेत्र: सर्किल रेट का दो गुना तक मुआवजा।
लैंड पूलिंग: जमीन देने वाले किसानों को योजना के तहत विकसित भूखंड आवंटित किए जाएंगे।
भूमि अधिग्रहण: लैंड पूलिंग के लिए सहमति नहीं देने वाले किसानों की भूमि नियमानुसार अधिग्रहित की जा सकती है।

अधिकारियों के अनुसार, लैंड पूलिंग के तहत आवेदन करने वाले किसानों के दावों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। वहीं, अधिग्रहण की प्रक्रिया लागू होने पर संबंधित नियमों और पात्रता के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा।

वरुण विहार योजना के लिए भी जुटाई जाएगी जमीन
एलडीए की वरुण विहार आवासीय योजना करीब 1450 एकड़ में प्रस्तावित है। इसके लिए लगभग 750 एकड़ जमीन लैंड पूलिंग के माध्यम से मिल चुकी है, जबकि करीब 100 एकड़ सरकारी भूमि है। शेष जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिग्रहण की योजना पर काम किया जा रहा है।

इस योजना के विकसित होने से सुलतानपुर रोड और किसान पथ के आसपास आवासीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना के निर्माण, प्लॉट आवंटन और विकास कार्यों की समयसीमा को लेकर आगे की आधिकारिक घोषणाएं महत्वपूर्ण होंगी।

लैंड पूलिंग और अधिग्रहण में क्या है अंतर?
लैंड पूलिंग में किसान अपनी जमीन योजना के लिए देते हैं और निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें विकसित भूखंड मिलते हैं। वहीं, भूमि अधिग्रहण में कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन ली जाती है और पात्र भूमि मालिकों को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है एलडीए की रणनीति है कि किसानों की सहमति से अधिक से अधिक भूमि लैंड पूलिंग के जरिए हासिल की जाए। इसके बाद भी जो जमीन बाकी रहेगी, उसके लिए अधिग्रहण का विकल्प अपनाया जा सकता है।

 

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