MLC Election Results 2026: उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव ने कई राज्यों में सियासी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी को पांच सीटें मिलीं। बिहार में भाजपा को पटना शिक्षक सीट गंवानी पड़ी, वहीं जन सुराज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। कर्नाटक में कांग्रेस चारों सीटों पर हार गई, जबकि भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में भी महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला देखने को मिला।
इन चुनावों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद के इन चुनावों का मतदाता वर्ग अलग होने के कारण इनके नतीजों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।
MLC चुनाव में कौन करता है मतदान? EVM की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल
विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। स्नातक सीटों पर निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता और शिक्षक सीटों पर निर्धारित शर्तों के तहत पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं। इन चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। मतदाता उम्मीदवारों के लिए अपनी प्राथमिकता दर्ज करते हैं और मतगणना में वरीयता आधारित प्रक्रिया लागू हो सकती है। चार राज्यों की कुल 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इनमें उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की आठ, कर्नाटक की चार और महाराष्ट्र की पांच सीटें शामिल थीं।
उत्तर प्रदेश: भाजपा को 6, सपा को 5 सीटें
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला रहा। उपलब्ध परिणामों के मुताबिक, भाजपा ने छह और सपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की।
वाराणसी में सपा की जीत ने खींचा ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सपा के लाल बिहारी यादव ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के प्रमोद मिश्रा को 4,898 वोटों से हराया। वाराणसी स्नातक सीट पर भी सपा के आशुतोष सिन्हा ने मतगणना के दौरान भाजपा के केदारनाथ सिंह पर बढ़त बनाई।
अन्य प्रमुख नतीजों में
मेरठ स्नातक: भाजपा के दिनेश कुमार गोयल विजयी।
आगरा स्नातक: भाजपा के डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह विजयी।
इलाहाबाद-झांसी स्नातक: सपा के मान सिंह यादव विजयी।
लखनऊ शिक्षक: भाजपा के उमेश द्विवेदी विजयी।
मेरठ शिक्षक: भाजपा के श्रीचंद शर्मा विजयी।
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक: भाजपा के हरि सिंह ढिल्लों विजयी।
आगरा-अलीगढ़ शिक्षक: सपा के आकाश अग्रवाल विजयी।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक: भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की।
इन नतीजों में भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि सपा ने स्नातक सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत की।
बिहार: पटना शिक्षक सीट पर भाजपा को झटका
बिहार की आठ विधान परिषद सीटों में चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। शिक्षक सीटों के नतीजों में पटना का मुकाबला विशेष रूप से चर्चा में रहा। करीब तीन दशक से पटना शिक्षक सीट पर जीतते आ रहे भाजपा नेता नवल किशोर यादव को राजद के डॉ. संजीव सिंह ने हरा दिया। इस परिणाम से भाजपा को महत्वपूर्ण सीट गंवानी पड़ी।
जन सुराज ने खोला खाता
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. सुरेश राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की। इससे पार्टी को विधान परिषद चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर मिला। सारण शिक्षक सीट पर भाजपा से निष्कासित राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की, जबकि तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह विजयी रहे। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी सीटों की मतगणना के परिणामों के लिए उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्थिति अलग-अलग चरणों में सामने आई।
कर्नाटक: कांग्रेस चारों सीटों पर हारी
कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के चुनाव में कांग्रेस को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने चारों सीटें जीत लीं।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: जेडीएस ने कांग्रेस से सीट छीन ली।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा विजयी।
दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा विजयी।
पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा विजयी।
इन परिणामों में भाजपा ने तीन सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि जेडीएस ने एक सीट पर जीत दर्ज की। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद विधान परिषद चुनाव में पार्टी का खाता नहीं खुला। हालांकि, इन नतीजों का राज्य सरकार की स्थिरता पर सीधा असर नहीं पड़ता। इन्हें विधान परिषद के सीमित मतदाता वर्ग के बीच हुए चुनाव के परिणाम के रूप में देखना चाहिए।
महाराष्ट्र: महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला
महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों में तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। उपलब्ध रुझानों के अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के उम्मीदवार तीन सीटों पर आगे थे, जबकि महाविकास अघाड़ी ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी और एक सीट पर उसका उम्मीदवार आगे चल रहा था।
पुणे स्नातक: एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की।
औरंगाबाद स्नातक: एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रतापसिंह पाटिल बढ़त बनाए हुए थे।
नागपुर स्नातक: भाजपा के सुधाकर कोहले आगे चल रहे थे।
पुणे शिक्षक: भाजपा के कौस्तुभ गावड़े आगे थे।
अमरावती शिक्षक: शिवसेना के किरण सरनायक आगे चल रहे थे।
ये आंकड़े मतगणना के दौरान उपलब्ध रुझानों पर आधारित हैं। इन्हें सभी सीटों के अंतिम परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चार राज्यों के नतीजों से क्या तस्वीर सामने आई?
चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव में अलग-अलग क्षेत्रीय समीकरण दिखाई दिए। उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला पांच और छह सीटों के अंतर तक सीमित रहा। बिहार में पटना शिक्षक सीट पर राजद की जीत और दरभंगा में जन सुराज की सफलता चर्चा में रही। कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटें जीतीं, जबकि महाराष्ट्र में मतगणना के दौरान दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी रही। इन चुनावों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इनमें शिक्षक और स्नातक मतदाता अपनी पसंद जाहिर करते हैं। लेकिन इनका मतदाता वर्ग आम विधानसभा चुनाव से अलग है। इसलिए 2027 के विधानसभा चुनावों में किस दल को कितना समर्थन मिलेगा, इसका निष्कर्ष केवल इन परिणामों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
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