Rishikesh-Karnaprayag Railway Project: उत्तराखंड के पहाड़ों में रेलवे कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाली ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए इसे हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच तैयार हो रहा इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण बताया। करीब 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। परियोजना पूरी होने के बाद बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा के साथ उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

125 किलोमीटर की रेल लाइन, 16 सुरंगें और 19 पुल
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस परियोजना की कुल लंबाई करीब 125 किलोमीटर है और इसमें 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इसके तहत करीब 104 किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। रेल लाइन में 16 सुरंगें और 19 पुल शामिल हैं। पहाड़ी भूभाग और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह भारतीय रेलवे की चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है।

हिमालय की चट्टानों ने बढ़ाई इंजीनियरों की चुनौती
इस परियोजना के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती हिमालय की जटिल भूगर्भीय संरचना है। रेल मंत्री के मुताबिक, हिमालय की युवा वलित पर्वत श्रृंखलाओं में कई स्थानों पर जमीन और चट्टानों की परतें अपेक्षाकृत कमजोर होती हैं। ऐसे क्षेत्रों में सुरंग बनाने के दौरान आसपास की मिट्टी और चट्टानों के दबाव से सुरंग का हिस्सा अंदर की ओर खिसकने या सिकुड़ने का खतरा रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए इंजीनियरों ने टनल बोरिंग मशीन (TBM) में विशेष बदलाव किए। मशीन के कटर हेड, शील्ड और ड्राइव सिस्टम में संशोधन किया गया, ताकि कमजोर भूगर्भीय परतों में भी सुरक्षित और प्रभावी तरीके से खुदाई की जा सके।

रेल मंत्री ने बताया कि मशीन के ड्राइव सिस्टम को अतिरिक्त टॉर्क और थ्रस्ट देने के लिए विशेष डिजाइन तैयार किया गया। इन बदलावों से परियोजना के कठिन हिस्सों में सुरंग निर्माण में मदद मिली है।

T-1 और T-5 सुरंगों पर विशेष फोकस
परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ज्यादातर हिस्सों में काम उन्नत चरण में है, जबकि T-1 और T-5 सुरंगों पर काम जारी है। T-1 सुरंग करीब 11 किलोमीटर लंबी है और इसे परियोजना के सबसे जटिल हिस्सों में से एक बताया गया है। यहां भूगर्भीय परिस्थितियां कठिन होने के साथ आसपास आबादी भी मौजूद है। ऐसे में जमीन को स्थिर रखने के लिए माइक्रोपाइल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेल मंत्री के अनुसार, इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन
इस रेल परियोजना में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक कई महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मार्ग में शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, तिलनी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग स्टेशन शामिल हैं। रेल लाइन तैयार होने के बाद पहाड़ी इलाकों में सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी देने में मदद मिल सकती है।

केदारनाथ-बदरीनाथ की यात्रा होगी आसान, रणनीतिक लिहाज से भी अहम
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का महत्व पर्यटन के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी है। रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने पर कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और केदारनाथ-बदरीनाथ की तीर्थयात्रा के लिए आवागमन अधिक सुविधाजनक होगा। रणनीतिक दृष्टि से भी यह रेल लाइन महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मंत्री के मुताबिक, परियोजना का अंतिम स्टेशन कर्णप्रयाग भारत-चीन सीमा से करीब 123 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में यह रेल संपर्क क्षेत्र में पहुंच और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत में ही बन रहीं टनल बोरिंग मशीनें
रेल मंत्री ने देश में टनल बोरिंग मशीनों के स्वदेशी निर्माण की दिशा में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहले भारत को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए TBM विदेशों से आयात करनी पड़ती थीं, लेकिन अब देश में ही इन मशीनों का निर्माण किया जा रहा है। उनके मुताबिक, भारत में 8 मीटर व्यास वाली TBM का निर्माण हो रहा है और 15 मीटर व्यास वाली मशीनों का निर्माण भी शुरू हो चुका है। तमिलनाडु में TBM निर्माण संयंत्र स्थापित है। आने वाले समय में 16 मीटर से अधिक व्यास वाली मशीनों के निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रेलवे, सड़क और ऊर्जा जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन, पर्यटन और परिवहन सुविधाओं को नया आधार मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक समयसीमा और परिचालन शुरू होने की तारीख के लिए रेलवे की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी होगा। 

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