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कावेरी जल विवाद मामले में आज कर्नाटक बंद
कर्नाटक आज कावेरी जल विवाद को लेकर बंद हैं। कावेरी जल विवाद को लेकर लोगों की भीड़ सड़कों पर ना उतरे उसके लिए पुलिस ने पहले ही सुरक्षा बढ़ा दी है।
KarnatakNews : कर्नाटक आज कावेरी जल विवाद को लेकर बंद हैं। कावेरी जल विवाद को लेकर लोगों की भीड़ सड़कों पर ना उतरे उसके लिए पुलिस ने पहले ही सुरक्षा बढ़ा दी है। कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने राज्य को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार तमिलनाडु को प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी देने के मामले में सहमति नहीं जताई। मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि तमिलनाडु की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद राज्य सरकार अपनी कार्रवाई तय करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि कर्नाटक के साथ किसी तरह का अन्याय न हो ।
पुलिस ने पहले से की सुरक्षा
कर्नाटक में कावेरी जल विवाद मामले में बंद के आह्वान का असर आज सड़कों पर दिखाई दे रहा है। लेकिन स्कूल,बैंक,अस्पताल,फार्मेसी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाए बंद के दौरान सामान् तौर पर चल रही है। क्योंकि बंद से पहले ही पुलिस ने सुरक्षा के सारे इंतजाम कर लिए थे। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल के मद्देनजर बंद से पहले अपनी तरफ से सारे इंतजाम कर लिए।
सीएम डीके शिवकुमार ने की अधिकारियों से बातचीत
दरअसल कावेरी जल विनियम समिति की दिल्ली में हुई बैठक में कर्नाटक द्वारा 12 अगस्त से 15 अगस्त तक तमिलनाडु को हर रोज 12,000 क्यूसेक पानी देने का निर्देश दिया था। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने बैठक के बाद इस फैसले पर अपनी सहमति भी जताई थी। मंत्री रामलिंगा रेड्डी की तरफ से कहा गया कि सीएम डीके शिवकुमार और अधिकारियों से बातचीत की गई है। सीएम ने हमारे वरिष्ठ वकीलों से भी बातचीत की। रेड्डी ने बताया कि तमिलनाडु की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। वकीलों ने अपनी आपत्तियां दर्ज की।
कम भंडारण बताया जल ना छोड़ने का कारण
तमिलनाडु सरकार ने इस महीने शुरूआत में कर्नाटक के साथ कावेरी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि CWRC द्वारा निर्देशित पानी की तय मात्रा और कर्नाटक को दी गई। लेकिन कर्नाटक ने उसे अपर्याप्त बताया था। इससे पूर्व 28 जुलाई को CWC ने कर्नाटक को तमिलनाडु को 15 दिनों के लिए 3,500 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया था। कर्नाटक ने शुरू में कहा कि जलाशयों में कम भंडारण के कारण वह जल नहीं छोड़ सकता।
कहां कहां होता है इस्तेमाल
रेड्डी ने यह तर्क भी दिया कि कर्नाटक ने पूर्व में दिए आदेशों का पालन करते हुए तमिलनाडु को अधिक मात्रा में पानी दिया। जब जल ग्रहण क्षेत्र में बारिश के कारण काबिनी बांध का जलस्तर ज्यादा हो जाता है तो पानी आगे की ओर बहने लगा। क्योंकि सरकार के पास उस पानी के संग्रहण का कोई साधन नहीं। रेड्डी ने यह भी कहा कि कर्नाटक के जलाशयों में 76 टीएमसी पानी है इसमें से हर वर्ष 36 टीएमसी पानी पीने के लिए इस्तेमाल होता है। कुछ पानी नदियों में जाता है तो कुछ खेतों में फसलों की सिंचाई के काम आता है। इसलिए कर्नाटक से 15 दिनों के लिए 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहना अनुचित है।
Written By: MADHVI TANWAR
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