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जौहर यूनिवर्सिटी पर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप, जांच में करोड़ों के खर्च और फर्जी दान की बात सामने आई
रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां से जुड़े जौहर ट्रस्ट पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, फर्जी दानदाता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है। जांच में सरकारी विभागों, सांसद-विधायक निधि और ट्रस्ट के खर्च से जुड़े कई दावों की पड़ताल की जा रही है।
Jauhar University Case: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां से जुड़े जौहर ट्रस्ट को लेकर चल रही जांच में वित्तीय अनियमितताओं के कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच में सरकारी धन के इस्तेमाल, आय से अधिक नकदी जमा करने, कथित फर्जी दानदाताओं और डमी ट्रस्टियों से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही है।
45 करोड़ खर्च का दावा, जांच में 494 करोड़ के प्रमाण का दावा
जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट की ओर से यूनिवर्सिटी के निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया था। वहीं, पूर्व में आयकर विभाग की जांच में करीब 494 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े प्रमाण मिलने की बात सामने आई थी। इसी अंतर को लेकर भी जांच एजेंसियों की ओर से वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।
जांच में यह भी आरोप है कि कुछ रकम को ब्लैक मनी के बजाय दान के रूप में दिखाया गया और कथित फर्जी दानदाताओं के जरिए ट्रस्ट के खातों में पैसा जमा कराया गया।
सरकारी विभागों के बजट से सड़क और दूसरे काम कराने का आरोप
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों में कई सरकारी विभागों के बजट के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग विभागों से करीब 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि आयकर जांच में यह रकम करीब 150 करोड़ रुपये तक होने के प्रमाण मिलने की बात कही गई है।
इन विभागों में सीएंडडीएस, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विकास, पिछड़ा वर्ग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल बताए गए हैं। जल निगम के बजट से भी अलग-अलग मदों में खर्च किए जाने का आरोप है। इन पैसों से सड़क, पुल, रिवरफ्रंट, नहर चौड़ीकरण और भवन निर्माण जैसे कार्य कराए जाने की बात कही गई है।
जांच के मुताबिक, सीएंडडीएस और जल निगम से जुड़े खर्च करीब 75 करोड़ रुपये, जबकि लोक निर्माण विभाग से करीब 13.73 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
सांसद और विधायक निधि से भी मिला पैसा
जांच में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सांसद और विधायक निधि के इस्तेमाल का मामला भी सामने आया है। आरोपों के मुताबिक, जनप्रतिनिधियों की निधि से करीब 4.57 करोड़ रुपये यूनिवर्सिटी के विभिन्न कार्यों में लगाए गए थे। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद इस रकम को वापस किए जाने की बात कही गई है।
जांच रिकॉर्ड में कई मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की निधि से अलग-अलग निर्माण कार्यों के लिए रकम दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
आय से अधिक नकदी जमा करने का आरोप
ट्रस्ट के बैंक खातों को लेकर भी जांच में सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि 2020-21 से 2024-25 के बीच ट्रस्ट ने अपनी घोषित आय से अधिक नकदी बैंकों में जमा कराई। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ रकम स्वैच्छिक दान के बजाय दबाव बनाकर जमा कराई गई। बिना पर्याप्त हिसाब-किताब वाली रकम को दान के तौर पर दिखाकर बैंक खातों में जमा करने की आशंका की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा ट्रस्ट की ओर से कुछ वर्षों के आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है।
डमी ट्रस्टी और कथित फर्जी दानदाता भी जांच के घेरे में
आजम खां और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में कथित डमी ट्रस्टी और फर्जी दानदाताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां ट्रस्ट की आय, दान, बैंक खातों, सरकारी धन और यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल सामने आईं बातें जांच में लगे आरोप और दावे हैं। इनकी अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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Written by Shailesh Yadav
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