देहरादून: उत्तराखंड में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की प्रस्तावित ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने रावत की यात्रा पर आपत्ति जताई है और उन्हें पार्टी संगठन के साथ समन्वय बनाकर पार्टी लाइन के मुताबिक काम करने की सलाह दी है।
दरअसल, हरीश रावत ने उत्तराखंड में अपनी ‘धन्यवाद यात्रा’ निकालने का ऐलान किया था। यह यात्रा 5 अक्टूबर से शुरू होनी थी। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक यात्रा जसपुर से शुरू होकर काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक जानी थी। रावत ने यात्रा को जनता से संवाद और आभार व्यक्त करने का कार्यक्रम बताया था।
पार्टी से नहीं हुई थी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह है कि यात्रा के कार्यक्रम को लेकर प्रदेश संगठन और पार्टी प्रभारी से पहले चर्चा नहीं की गई थी। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर को हरीश रावत को पत्र लिखकर यात्रा को लेकर संगठन से समन्वय की बात कही थी।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के सभी नेताओं और संगठन को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। ऐसे में पार्टी संगठन से अलग किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है।
हाईकमान ने दिल्ली बुलाया
मामले के बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाया है। माना जा रहा है कि बैठक में उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति, रावत की यात्रा और आगामी चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। वह राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से दिया गया संदेश उत्तराखंड में पार्टी की आगामी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
चुनाव से पहले संगठन पर फोकस
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दे रही है। हाईकमान की ओर से रावत को पार्टी लाइन के अनुसार चलने की सलाह को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा तेज है। पार्टी नेतृत्व और रावत के बीच होने वाली अगली बातचीत के बाद इस कार्यक्रम को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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