Samajwadi Party News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी में एक अहम बदलाव हुआ है। करीब नौ साल तक लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने वाले शिवपाल सिंह यादव की जगह अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे। सोमवार को हुई लोहिया ट्रस्ट की बैठक में अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति बनी।

बैठक में ट्रस्ट के सभी आठ सदस्य मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि शिवपाल सिंह यादव भी बैठक में शामिल थे। हालांकि, इस बदलाव को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिसमें इसे वर्ष 2017 के पारिवारिक विवाद से जोड़कर देखा गया हो।

2017 में मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल को सौंपी थी जिम्मेदारी

लोहिया ट्रस्ट में यह बदलाव करीब नौ साल बाद हुआ है। वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी के भीतर वर्चस्व को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। उसी दौरान तत्कालीन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को हटाकर शिवपाल सिंह यादव को लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया था।इसके बाद से शिवपाल यादव ही ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ट्रस्ट की कमान सपा प्रमुख के हाथों में आ गई है।

अखिलेश के पास पहले से हैं कई अहम जिम्मेदारियां

अखिलेश यादव पहले से ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसके अलावा उनके पास जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की जिम्मेदारी भी है। अब लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी और उससे जुड़े दोनों प्रमुख ट्रस्टों की कमान भी उनके पास आ गई है।यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। इसलिए इस बदलाव को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, शिवपाल यादव की आगामी भूमिका और अखिलेश यादव के साथ उनके संबंधों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

भाजपा ने साधा निशाना, परिवारवाद का लगाया आरोप

लोहिया ट्रस्ट में हुए बदलाव के बाद भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इस घटनाक्रम को सपा के पुराने पारिवारिक विवाद से जोड़ते हुए सवाल उठाए।राकेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया के नाम पर बने ट्रस्ट को परिवार का केंद्र बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोहिया की विचारधारा और उनकी विरासत का अपमान है।भाजपा प्रवक्ता ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा में हुए चाचा-भतीजे के विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच टकराव सामने आया था और अब एक बार फिर चाचा की जगह भतीजे के हाथों में जिम्मेदारी आ गई है।

2017 से 2026 तक बदल गई सपा परिवार की तस्वीर

वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आई थी। उस समय अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच राजनीतिक मतभेद काफी चर्चा में रहे थे। हालांकि, 2026 तक सपा परिवार की राजनीतिक तस्वीर में काफी बदलाव आ चुका है।अब अखिलेश यादव पार्टी की कमान संभाल रहे हैं और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व उनके पास हैं। लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता भी मिलने के बाद उनका प्रभाव और बढ़ा है। दूसरी ओर, शिवपाल यादव की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।