भारतीय घरेलू क्रिकेट के उभरते विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल इन दिनों क्रिकेट से ज्यादा एक कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। बंगाल के इस युवा खिलाड़ी पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने जांच एजेंसियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और अदालत की ओर से दोष सिद्ध नहीं हुआ है। ऐसे में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
घरेलू क्रिकेट से बनाई पहचान
अभिषेक पोरेल पश्चिम बंगाल के चंदननगर के रहने वाले हैं और घरेलू क्रिकेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह तेज गेंदबाज ईशान पोरेल के चचेरे भाई हैं। जूनियर क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें ईस्ट जोन अंडर-19 टीम में जगह मिली, जहां उनकी विकेटकीपिंग और आक्रामक बल्लेबाजी ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। वर्ष 2022 में उन्होंने बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया और जल्द ही टीम के भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज बन गए। अब तक वह 32 फर्स्ट क्लास मैचों में 1408 रन और 22 लिस्ट-ए मुकाबलों में 833 रन बना चुके हैं।
ऋषभ पंत की जगह मिला IPL में बड़ा मौका
साल 2023 में ऋषभ पंत के सड़क हादसे के बाद दिल्ली कैपिटल्स को नए विकेटकीपर की जरूरत थी। फ्रेंचाइजी ने अभिषेक पोरेल को रिप्लेसमेंट खिलाड़ी के रूप में टीम में शामिल किया। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ अपने आईपीएल डेब्यू में 11 गेंदों पर 20 रन की तेज पारी खेलकर प्रभावित किया। उनके प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में रिटेन भी किया। आईपीएल में अब तक वह 35 मैचों में 769 रन बना चुके हैं, जिसमें चार अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने कई अहम मौकों पर उपयोगी पारियां खेलकर खुद को भविष्य के प्रतिभाशाली विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया।
दुष्कर्म के आरोप और कोर्ट की कार्रवाई
अभिषेक पोरेल के खिलाफ एक महिला ने शादी का वादा कर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने जांच एजेंसियों को उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करने और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि अदालत ने अभी तक उन्हें दोषी नहीं ठहराया है और जांच जारी है। यदि गिरफ्तारी होती है, तो वह भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होगी, न कि दोष सिद्ध होने का प्रमाण। मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
Written By: Geeta Sharma