कराची: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में आवास संकट गहराता जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, शहर की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी अनौपचारिक बस्तियों में रहने को मजबूर है, क्योंकि सस्ते और योजनाबद्ध आवास की भारी कमी बनी हुई है।

कराची में आवास समस्या

रिपोर्ट के मुताबिक, कराची की तेजी से बढ़ती आबादी और रोजगार के लिए बढ़ते पलायन ने शहर के आवास ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ाया है। पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों से दशकों से हो रहे बड़े पैमाने के पलायन के कारण शहर का विस्तार हुआ,लेकिन आवास विकास आबादी की रफ्तार के साथ नहीं चल पाया।

रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने शुरुआती दौर में पाकिस्तान क्वार्टर्स, मार्टिन क्वार्टर्स, फेडरल बी एरिया और पापोश नगर जैसी योजनाबद्ध आवासीय कॉलोनियां विकसित की थीं। हालांकि, इन योजनाओं का बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के लोगों तक सीमित रहा, जिससे कम आय वाले परिवार औपचारिक आवास व्यवस्था से बाहर रह गए।

अनौपचारिक बस्तियों का विस्तार

कराची में आवास समस्या को दूर करने के लिए कई सरकारी योजनाएं और पुनर्वास परियोजनाएं शुरू की गईं, लेकिन इसके बावजूद अनौपचारिक बस्तियों का विस्तार जारी रहा। 1951 में तैयार किए गए ग्रेटर कराची प्लान में सैटेलाइट टाउन, औद्योगिक क्षेत्र, बेहतर परिवहन व्यवस्था और योजनाबद्ध आवास विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन शहर की आवास चुनौती अब भी बनी हुई है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, कराची का आवास संकट केवल घरों की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, परिवहन, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ है। कमजोर शहरी नियोजन, अपर्याप्त सार्वजनिक ढांचे और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण बड़ी आबादी आज भी पर्याप्त सुविधाओं से वंचित है।