मुंबई: मुंबई और नवी मुंबई के बाद महाराष्ट्र में एक और बड़ा शहर बसाने की तैयारी तेज हो गई है। इसे ‘तीसरी मुंबई’ या करनाला-साई-चरनेर (KSC) टाउनशिप के नाम से विकसित किया जाएगा। रायगढ़ जिले में बनने वाले इस नए शहर का मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने सिंगापुर की अर्बन प्लानिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंसी कंपनी Surbana Jurong Infrastructure Pvt Ltd को सौंपी है।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना पनवेल, उरण और पेन विकास खंडों की करीब 324 वर्ग किलोमीटर जमीन पर विकसित की जाएगी। इसमें लगभग 104 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आवासीय परियोजनाओं के लिए रखा गया है। यानी आने वाले वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर घर, कारोबार और आधुनिक सुविधाओं वाला नया शहरी इलाका विकसित होने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर से लेकर डेटा सेंटर तक का हब
तीसरी मुंबई को सिर्फ एक रिहायशी शहर के तौर पर विकसित करने की योजना नहीं है। इसे आधुनिक उद्योगों और टेक्नोलॉजी का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी है। प्रस्तावित टाउनशिप में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और आईटी हब विकसित करने की योजना है। सरकार की कोशिश इसे बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर बड़े टेक और बिजनेस हब के रूप में विकसित करने की है। इसके बुनियादी ढांचे पर MMRDA करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है।

एयरपोर्ट और अटल सेतु से मिलेगी रफ्तार
तीसरी मुंबई की सबसे बड़ी ताकत इसकी कनेक्टिविटी होगी। यह क्षेत्र नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (अटल सेतु) के बेहद करीब है। 21.8 किलोमीटर लंबा अटल सेतु मुंबई के सेवरी को नवी मुंबई के न्हावा शेवा से जोड़ता है। इस पुल ने मुंबई और नवी मुंबई के बीच यात्रा का समय काफी कम कर दिया है। आने वाले समय में यही कनेक्टिविटी तीसरी मुंबई के विकास को भी रफ्तार देने वाली मानी जा रही है।

विरार-अलीबाग कॉरिडोर बनेगा बड़ी कड़ी
तीसरी मुंबई को विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर से भी जोड़ने की योजना है। करीब 126 किलोमीटर लंबा यह बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पालघर के विरार से रायगढ़ के अलीबाग तक कनेक्टिविटी मजबूत करेगा। इस कॉरिडोर में एक्सप्रेसवे के साथ मेट्रो और रैपिड रेल जैसी सुविधाओं को भी विकसित करने की योजना है। इसके अलावा गैस पाइपलाइन, बिजली केबल और ऑप्टिकल फाइबर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। हाईस्पीड रेल कनेक्टिविटी से जुड़ने के बाद इस पूरे क्षेत्र की आवाजाही और तेज हो सकती है।

मुंबई-पुणे और JNPT से भी मजबूत कनेक्शन
नई टाउनशिप की लोकेशन ऐसी है कि इसे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। इससे गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की तरफ से आने वाले मालवाहक वाहनों को मुंबई शहर के भीतर प्रवेश किए बिना नवी मुंबई और जेएनपीटी की ओर जाने का वैकल्पिक रास्ता मिलेगा। इसी वजह से इस परियोजना को सिर्फ नया शहर नहीं, बल्कि मुंबई महानगर क्षेत्र के भविष्य के आर्थिक और लॉजिस्टिक विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।

‘मुंबई 3.0’ को लेकर बड़ा दावा
हीरानंदानी ग्रुप के प्रमुख निरंजन हीरानंदानी ने ‘मुंबई 3.0’ और पनवेल-रायगढ़ कॉरिडोर को भारत के बड़े ग्रोथ कॉरिडोर में शामिल होने की संभावना जताई है। उनके मुताबिक, आने वाले एक-दो दशकों में तीसरी मुंबई विकास के मामले में नवी मुंबई को भी पीछे छोड़ सकती है।

परियोजना को लेकर सरकार की तैयारी भी तेजी से आगे बढ़ रही है। MMRDA और Surbana Jurong के बीच 9 अगस्त को समझौता हुआ, जिसके तहत मास्टर प्लान और विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा। परियोजना की घोषणा दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की थी। अगर योजना तय दिशा में आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में रायगढ़-पनवेल क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। ‘तीसरी मुंबई’ न सिर्फ रहने के लिए नया विकल्प दे सकती है, बल्कि महाराष्ट्र के आर्थिक नक्शे पर एक नया पावर सेंटर भी बन सकती है। 

और पढ़ें: गोरखपुर में विकास की नई उड़ान! 153 एकड़ में बनेगा लॉजिस्टिक क्लस्टर, लिंक एक्सप्रेसवे किनारे उद्योगों को मिलेगी रफ्तार