New Delhi: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने संसद में जारी गतिरोध को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति बहुमत यानी सत्ता पक्ष की संसदीय शिष्टाचार की सोच और अल्पमत यानी विपक्ष के 'सामंती अहंकार की सनक' का जीता-जागता प्रमाण है। नकवी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह शर्तों के साथ संसदीय चर्चा और बहस की मांग कर रहा है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और तर्क के माध्यम से मुद्दों का समाधान होना चाहिए।
नकवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद में सरकार की ओर से चर्चा और बहस की इच्छा स्पष्ट है, लेकिन विपक्ष की ओर से इसे स्वीकार करने के बजाय लगातार विरोध और हंगामा किया जा रहा है। उन्होंने इसे 'तर्कों की कंगाली में कुतर्कों के मवाली' जैसा व्यवहार करार दिया।
‘सरकार की ओर से कोई भी मंत्री दे सकता है जवाब’
पूर्व संसदीय कार्य मंत्री नकवी ने कहा कि संसद में किसी विषय पर विपक्ष की ओर से कौन चर्चा में हिस्सा लेगा, इसका निर्णय संबंधित विपक्षी दल करता है। वहीं, सरकार की ओर से किसी भी विषय पर कोई भी सक्षम मंत्री बोल सकता है और जवाब दे सकता है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 75(3) का उल्लेख करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, यही देश की स्थापित संवैधानिक और संसदीय व्यवस्था है। नकवी ने विपक्ष से इस व्यवस्था के अनुरूप सदन की कार्यवाही में भाग लेने और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने की अपील की।
‘चर्चा की मांग का विरोध लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ’
नकवी ने कांग्रेस और उसके कुछ विपक्षी सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की ओर से डिबेट और डिस्कशन की रिक्वेस्ट का लगातार विरोध विपक्ष की 'डिफॉल्टर डायनेस्टी' की 'डिस्ट्रक्टिव डींगबाजी' से ज्यादा कुछ नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को चर्चा और संवाद का मंच बनाने के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बना रहा है। नकवी के मुताबिक, संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस होनी चाहिए, ताकि सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठें और सरकार उनका जवाब भी दे सके।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए नकवी ने कहा कि उनका तथाकथित राजनीतिक परिश्रम 'पॉलिटिकली करेक्ट' होने के बजाय 'पॉलिटिकली करप्ट' साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनका यह राजनीतिक परिश्रम 'पराजय और पलीते' का पर्याय बनता जा रहा है।
नकवी ने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति और विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल आरोप-प्रत्यारोप और विरोध के जरिए लोकतांत्रिक जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने के साथ-साथ चर्चा में भाग लेकर वैकल्पिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करना चाहिए।
छात्रों के मुद्दे पर 'डबल स्टैंडर्ड' का आरोप
नकवी ने छात्रों से जुड़े प्रदर्शनों और विभिन्न राज्यों में कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग जंतर-मंतर पर छात्रों की आवाज को जोर-शोर से उठाते हैं, वही झारखंड में कथित घटनाओं पर अलग रुख अपनाते दिखाई देते हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर आवाज उठाने वाले लोग झारखंड में आंसू गैस की घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं। नकवी ने इसे विपक्ष का 'डबल स्टैंडर्ड' बताते हुए कहा कि छात्रों के हितों के नाम पर इस तरह की राजनीति जनता को भ्रमित करने वाली है।
'संसद संवाद और जवाबदेही का मंच'
नकवी ने कहा कि लोकतंत्र में संसद का महत्व केवल राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं है। यह सरकार और विपक्ष दोनों के लिए जनता के प्रति जवाबदेही तय करने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विपक्ष से हंगामे के बजाय बहस और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। भाजपा नेता ने कहा कि सरकार अपनी नीतियों और फैसलों पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को भी संसदीय परंपराओं का सम्मान करते हुए इस अवसर का इस्तेमाल करना चाहिए।
Edited By: Geeta Sharma
Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती