गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इसी दौरान ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या भी सामने आ सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान करीब 5 में से 1 महिला में डायबिटीज की समस्या देखने को मिल सकती है। इसे जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है।
क्या है जेस्टेशनल डायबिटीज?
गर्भावस्था के दौरान पहली बार ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाना जेस्टेशनल डायबिटीज कहलाता है। कई महिलाओं में डिलीवरी के बाद ब्लड शुगर सामान्य हो जाता है, लेकिन इस स्थिति को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
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मां और बच्चे दोनों के लिए हो सकती है परेशानी
गर्भावस्था में ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा रहने पर मां और बच्चे दोनों की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना जरूरी है।
किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
जिन महिलाओं का वजन ज्यादा है, परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या पिछली प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज हो चुकी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए।
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कैसे रखें ब्लड शुगर कंट्रोल?
गर्भावस्था में संतुलित खान-पान, डॉक्टर की सलाह के अनुसार शारीरिक गतिविधि और नियमित जांच महत्वपूर्ण है। मीठे और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना भी मददगार हो सकता है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या असामान्य थकान जैसे लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लें। हालांकि, जेस्टेशनल डायबिटीज कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकती है, इसलिए डॉक्टर द्वारा सुझाई गई शुगर स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण है।
Written By: Shivani Gupta