आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग फिट रहने के लिए कई तरह के उपाय अपनाते हैं। वहीं, प्रकृति के करीब रहने का एक आसान तरीका नंगे पैर जमीन पर चलना भी माना जाता है। आयुर्वेद में भी धरती के संपर्क में आने को शरीर और मन के संतुलन से जोड़ा गया है। हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि रोजाना कुछ समय नंगे पैर चलने की आदत स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। उन्होंने लोगों को "धरती से दोबारा जुड़ने" की सलाह दी और बताया कि घास, मिट्टी या रेत पर नंगे पैर चलने से शरीर को आराम मिलता है और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
जमीन के संपर्क में आने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
डॉक्टर आलोक चोपड़ा के अनुसार, जब पैर सीधे धरती के संपर्क में आते हैं तो शरीर और प्रकृति के बीच एक प्राकृतिक जुड़ाव बनता है। उनका कहना है कि इससे शरीर के इलेक्ट्रिकल बैलेंस को बनाए रखने में मदद मिल सकती है और कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को सपोर्ट मिलता है। उन्होंने रिपोलराइजेशन प्रक्रिया का भी जिक्र किया, जिसमें कोशिकाएं अपनी सामान्य इलेक्ट्रिकल स्थिति में वापस आती हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, यह प्रक्रिया शरीर की कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बेहतर ब्लड सर्कुलेशन में मददगार हो सकता है
कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि जब लाल रक्त कोशिकाएं अपनी सामान्य स्थिति में रहती हैं तो वे रक्त प्रवाह में आसानी से घूम सकती हैं। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, नंगे पैर चलने के इन फायदों को लेकर वैज्ञानिक शोध अभी जारी हैं, लेकिन तनाव कम करने, रिलैक्सेशन और प्रकृति से जुड़ाव के लिए इसे एक अच्छी आदत माना जाता है।
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नंगे पैर चलने के संभावित फायदे
तनाव और मानसिक थकान कम करने में मदद मिल सकती है।
मूड बेहतर करने और मन को शांत रखने में सहायता मिल सकती है।
शरीर में संतुलन और आराम का एहसास बढ़ सकता है।
प्रकृति के करीब रहने का अनुभव मिलता है।
नियमित वॉक से एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा मिलता है।
नंगे पैर चलने का सही तरीका
अगर आप नंगे पैर चलने की शुरुआत करना चाहते हैं तो घास, मिट्टी या रेत जैसी प्राकृतिक जगहों का चुनाव करें। रोजाना 15 से 30 मिनट तक आराम से चलना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। सुबह के समय शांत वातावरण में वॉक करना कई लोगों के लिए ज्यादा आरामदायक अनुभव हो सकता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने की कोशिश की जा सकती है।
Written by Rozi Sinha