पुराने दौर में घर की महिलाएं पैसों के लिए अक्सर अपने पिता, पति और भाई पर निर्भर रहती थी। लेकिन आज कल के आधुनिक ज़माने में जहां बेटियां आत्मनिर्भर हो रही है तो वही टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी बड़ा नाम कर रही हैं। वहीं अगर बात शेयर मार्केट की हो तो आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 तक करीब 1.61 करोड़ महिलाएं म्यूचुअल फंड निवेशक बन चुकी थीं। अब वही महिलाएं म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और Gold ETF में पैसा लगा रही हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड की SIP, इक्विटी फंड और Gold ETF तक भी पहुंच रही है। महिलाएं अब सिर्फ पैसे बचाने वाली नहीं, बल्कि उसे अलग-अलग जगह लगाकर बढ़ाने वाली निवेशक बन रही हैं। शेयर मार्केट से जो नया आंकड़ा आया है, वह साफ बता रहा क‍ि बेट‍ियां अब शेयर मार्केट के गेम पलट रही हैं।

सोने की चमक ने बेटियों को भी खींचा
महिलाओं ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में कदम तो बढ़ाया ही, लेकिन सोने को भी नहीं छोड़ा। मार्च 2025 में महिलाओं के पैस‍िव फंड पोर्टफोल‍ियो में Gold ETF की हिस्सेदारी सिर्फ 6.4 फीसदी थी। एक साल बाद मार्च 2026 में यह बढ़कर 16.4 फीसदी हो गई। यानी पोर्टफोलियो में Gold ETF की हिस्सेदारी करीब ढाई गुना हो गई। इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाओं का पैसा ढाई गुना हो गया। मतलब यह है कि महिलाओं के Passive Fund निवेश में Gold ETF को मिलने वाली जगह तेजी से बढ़ी और इसके पीछे सोने की कीमतों में तेजी के साथ-साथ दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता भी एक बड़ी वजह रही। 

यह भी पढ़ें:सोना-चांदी पहुंच से दूर! रक्षाबंधन पर बिक रही गोबर से बनी राखी और ज्वैलरी

निवेश शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
* बिना जानकारी के किसी शेयर में पैसा न लगाएं।
* सोशल मीडिया या किसी इन्फ्लुएंसर की सलाह पर तुरंत निवेश न करें।
* पूरी बचत एक ही शेयर में लगाने से बचें।
* एफएंडओ और इंट्राडे में जोखिम समझे बिना पैसा न लगाएं।
* लंबी अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश करें।
* जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

क्यों बढ़ रही है युवा महिलाओं की शेयर बाजार में दिलचस्पी?
इसके पीछे कई वजहें हैं। डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म ने निवेश शुरू करना पहले के मुकाबले आसान बनाया है। अब मोबाइल से ही डीमैट खाता खोलना, शेयर खरीदना और अपने निवेश पर नजर रखना संभव है। इसके अलावा नौकरीपेशा महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ने से अपने पैसे को सिर्फ बचाने के बजाय उसे निवेश करने की सोच भी मजबूत हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, युवा महिलाएं लंबे समय के लिए निवेश और नियमित बचत पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।

अब गहने नहीं, Gold ETF भी बन गया निवेश डेस्‍ट‍िनेशन
भारतीय घरों में सोने का रिश्ता महिलाओं से पुराना है। लेकिन पहले सोना मतलब अक्सर गहने. शादी के लिए सोना, बेटी के लिए सोना, मुश्किल वक्त के लिए सोना. अब इसमें Gold ETF चार चांद लगा रहा है। Gold ETF में निवेश करने पर आपको सोने की ईंट या गहना घर में रखने की जरूरत नहीं होती। यह बाजार में ट्रेड होने वाला निवेश साधन है और इसकी कीमत सोने के बाजार भाव से जुड़ी होती है। यानी जिस सोने को महिलाएं कभी लॉकर में रखती थीं, अब उसी सोने की कीमत पर बाजार में निवेश का दांव लगाया जा रहा है। यही वजह है कि Gold ETF महिलाओं के पोर्टफोलियो में तेजी से जगह बना रहा है।

Debt Funds में भी यही कहानी
25 साल से कम उम्र में Debt Funds की हिस्सेदारी 2.1 फीसदी थी, जबकि 58 साल से ज्यादा उम्र में यह बढ़कर 12 फीसदी हो गई। यानी उम्र के साथ बाजार में लगाया गया दांव थोड़ा संभलने लगता है। पांच साल में महिलाओं का निवेश ₹5.84 लाख करोड़ से ₹15.88 लाख करोड़ हो गया। यह आंकड़ा पूरी कहानी को सबसे अच्छी तरह समझाता है।

Gold ETF में पूरे रिटेल निवेशकों की भी बढ़ी दिलचस्पी
महिलाओं का Gold ETF की तरफ बढ़ता रुझान कोई अकेली कहानी नहीं है। पूरे Retail Investor वर्ग में भी Gold ETF का आकर्षण बढ़ा है। FY21 में Retail Investors के Gold ETF Assets में हिस्सेदारी करीब 4.6 फीसदी थी। FY26 में यह बढ़कर 14.9 फीसदी हो गई. Gold ETF में FY26 के दौरान करीब ₹69,000 करोड़ का नेट इनफ्लो आया।  यह पिछले पांच वित्त वर्षों में आए करीब ₹30,213 करोड़ के कुल संयुक्त इनफ्लो से भी दोगुने से ज्यादा है। यानी सोना सिर्फ आभूषण की अलमारी से निकलकर अब निवेश पोर्टफोलियो की स्क्रीन पर भी पहुंच चुका है। बेटियों का खेल सिर्फ ज्यादा पैसा लगाने का नहीं, समझदारी से बांटने का है।