Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार से पहले बाजारों में तरह-तरह की राखियां नजर आने लगी हैं। लेकिन राजस्थान के पाली से सामने आई एक अनोखी पहल ने हर किसी का ध्यान खींच लिया है। यहां गोबर से सिर्फ राखी ही नहीं, बल्कि नेकलेस, ईयररिंग्स और नोज रिंग जैसे आभूषण भी तैयार किए जा रहे हैं।

गोबर से तैयार हो रही राखी और ज्वैलरी
पाली में एक व्यक्ति ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गोबर से अलग-अलग डिजाइन की राखियां और ज्वैलरी तैयार की है। इन उत्पादों को आकर्षक और पर्यावरण के अनुकूल रंगों से सजाया जाता है। इसके बाद धागे की मदद से इन्हें राखी का रूप दिया जाता है।

इस पहल की खास बात यह है कि देखने में ये उत्पाद काफी आकर्षक हैं। गोबर से तैयार किए गए नेकलेस, झुमके और नाक की ज्वैलरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पहली नजर में इनके असली मटेरियल का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।

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राखी में डाले गए हैं बीज, बाद में उगेंगे पौधे
गोबर से बनी राखी को सिर्फ सजावटी वस्तु नहीं बनाया गया है। कुछ राखियों में खास किस्म के बीज भी डाले गए हैं। राखी उतारने के बाद इसे मिट्टी में लगाया जा सकता है, जिससे समय के साथ फूल देने वाले पौधे उग सकते हैं। इस तरह राखी भाई-बहन के रिश्ते की याद को अपने साथ रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।

सोना-चांदी के विकल्प के तौर पर अनोखी पहल
रक्षाबंधन के मौके पर बाजार में चांदी और सोने की राखियों की भी मांग रहती है। वहीं, बढ़ती कीमतों के बीच कम खर्च और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। बिहारशरीफ के बाजारों में भी इस साल सोने और चांदी की राखियों के साथ डिजाइनर राखियों की अलग-अलग रेंज देखने को मिल रही है। गोबर से बनी ज्वैलरी इसी ट्रेंड को एक अलग दिशा देती है। इसे ग्राहक अपनी पसंद की साड़ी या ड्रेस के डिजाइन के मुताबिक भी तैयार करवा सकते हैं।

क्यों खास है ईको-फ्रेंडली राखी?
गोबर से बनी राखी और ज्वैलरी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। खास तौर पर बीज वाली राखी इस्तेमाल के बाद मिट्टी में लगाई जा सकती है। इससे त्योहार के बाद राखी को फेंकने के बजाय उसका इस्तेमाल पौधा उगाने के लिए किया जा सकता है।

ऐसी बायोडिग्रेडेबल चीजें त्योहारों में प्लास्टिक और अन्य गैर-जैविक सामग्री के इस्तेमाल को कम करने का विकल्प भी दे सकती हैं।

5 खास बातें
* राजस्थान के पाली में गोबर से राखी और ज्वैलरी तैयार की जा रही है।
* गोबर से नेकलेस, ईयररिंग्स और नोज रिंग भी बनाई जा रही हैं।
* कुछ राखियों में फूलों वाले पौधों के बीज डाले गए हैं।
* राखी को इस्तेमाल के बाद मिट्टी में लगाया जा सकता है।
* यह पहल पर्यावरण संरक्षण और बायोडिग्रेडेबल उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश है।